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भाई ने डांटा, 10 साल की बच्ची ने लगाई फांसी:दरवाजा खोलने में देरी को लेकर हुई थी लड़ाई, चुन्नी का फंदा बनाकर झूली

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छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में भाई की डांट से नाराज एक 10 साल की बच्ची ने फांसी लगाकर सुसाइड कर लिया। 19 मार्च की शाम गुरप्रीत कौर घर पर अकेली थी। मोबाइल में स्पीकर ऑन कर पापा से बात कर रही थी। तभी बड़े भाई ने दरवाजा खटखटाया लेकिन गुरप्रीत फोन पर थी इसलिए सुन नहीं पाई। देरी से दरवाजा खोला तो भाई ने डांट दिया। इससे नाराज बहन घर की गैलरी में चुन्नी का फंदा बनाकर लटक गई। मामला जामुल थाना क्षेत्र का है।

अब पढ़िए पूरी कहानी

घटना गुरुवार 19 मार्च शाम की है। गणेश नगर वार्ड-5 में रहने वाली गुरप्रीत कौर उर्फ खुशी कक्षा चौथी में पढ़ती थी। वह स्वामी आत्मानंद स्कूल जामुल की छात्रा थी। उसके पिता ड्राइवर हैं और मां ब्यूटी पार्लर में काम करती है। 2 बड़े भाई भी है, लेकिन घटना के समय घर में कोई बड़ा सदस्य मौजूद नहीं था। परिवार मूलत: ओडिशा का रहने वाला है।

गुरप्रीत फोन पर अपने पापा से बात कर रही थी। तभी 17 साल का भाई घर लौटा और दरवाजा खटखटाने लगा। स्पीकर ऑन था इसलिए गुरप्रीत सुन नहीं पाई और देरी से दरवाजा खोला तो भाई ने डांट दिया। गुरप्रीत ने पापा को सब बता दिया।

जिसके बाद पापा ने बड़े भाई को डांट लगाई। इससे गुस्से में आकर भाई ने फिर बहन को जमकर डांट लगाई और खाना लेकर टीवी देखने चला गया। थोड़ी देर बाद जब भाई ने पानी मांगा तो कोई आवाज नहीं आई। रुम से बाहर निकलकर देखा तो बहन चुन्नी के बनाए फंदे पक लटकी मिली।

टेबल लगाकर बनाया फंदा, फांसी पर झूली

पड़ोसियों ने बताया कि, घर में उस समय बच्ची अपने भाई के साथ थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर उसका अपने भाई से विवाद हो गया। भाई ने उसे डांट दिया था।

इस बात से बच्ची काफी नाराज और दुखी हो गई। इसके बाद उसने टेबल लगाकर चुनरी के सहारे पंखे से फांसी लगा ली।

डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

बताया जा रहा है कि, जब बच्ची के फंदे में फांसी लगाने की सूचना मिली तो परिजनों और पड़ोसियों ने बच्ची को फंदे से उतारा और उसे पास के अस्पताल ले गए। इसके बाद उसे भिलाई के बीएम शाह अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बच्ची को मृत घोषित कर दिया। शुक्रवार को बच्ची का अंतिम संस्कार किया गया है।

पुलिस कर रही जांच

फिलहाल जामुल पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है और पूरे मामले की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना के पीछे और कोई कारण तो नहीं था।

क्या कहते हैं साइकोलॉजिस्ट

मनोवैज्ञानिक दीप्ति दुबे ने कहा – डांटना को समझ पाना मुश्किल होता है। बच्चे इसे एक्सेप्ट नहीं कर पाते। इस एज में जो भी कर रहे अच्छा बुरा सब करने दे। ये एक सिचवेशन रहता है। भलाई के लिए डांट हो वो सोच पाने में असमर्थ होते हैं। वे इसे डिरिस्पेक्ट मानते हैं। बच्चे सोचते हैं इससे अच्छा अपने आपको खत्म कर लेते हैं।

इस तरह के मामले में सोशल मीडिया का भी बहुत बड़ा हाथ होता है। जो नहीं देखना चाहिए वो देख रहे हैं। जो देख रहे वह समझ नहीं आता, बच्चे खुद इम्लीमेंट करते हैं। पैरेंट्स को अपने बच्चों से हर बात में डिस्कशन करना चाहिए। मोबाइल पर देखे जाने वाले रील हर किसी के लिए नहीं होते।

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