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गर्मियों में पानी की कमी बन सकती है जानलेवा, हाई बीपी वालों के लिए डिहाइड्रेशन बड़ा खतरा

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गर्मियों का मौसम आते ही शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। यह समस्या देखने में सामान्य लग सकती है, लेकिन इसका असर शरीर के कई अहम सिस्टम पर पड़ता है, खासकर दिल और ब्लड प्रेशर पर। जब शरीर में पर्याप्त पानी नहीं होता, तो खून गाढ़ा होने लगता है और ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है। ऐसे में High Blood Pressure से जूझ रहे लोगों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक हो सकती है।

डिहाइड्रेशन तब होता है जब शरीर से पानी और जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स जैसे सोडियम और पोटेशियम की मात्रा कम हो जाती है। गर्मी में ज्यादा पसीना आना, उल्टी-दस्त, बुखार या पर्याप्त पानी न पीना इसके मुख्य कारण होते हैं। कई बार प्यास न लगने पर लोग पानी पीना टाल देते हैं, जो धीरे-धीरे शरीर को गंभीर स्थिति में पहुंचा सकता है।

जब शरीर में पानी की कमी होती है, तो ब्लड वॉल्यूम घटने लगता है। इस स्थिति को संभालने के लिए शरीर एक विशेष हॉर्मोनल सिस्टम को एक्टिव करता है, जिसे Renin-Angiotensin-Aldosterone System कहा जाता है। यह सिस्टम ब्लड वेसल्स को संकुचित कर देता है और शरीर में पानी-सोडियम को रोकने की कोशिश करता है, जिससे अचानक ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। जिन लोगों को पहले से हाई बीपी या हार्ट की समस्या है, उनके लिए यह स्थिति जोखिम भरी हो जाती है।

डिहाइड्रेशन का असर दिल पर भी साफ दिखाई देता है। खून का वॉल्यूम कम होने पर दिल को शरीर के हर हिस्से तक ब्लड पहुंचाने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे हार्टबीट तेज हो जाती है और दिल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। गंभीर मामलों में चक्कर आना, कमजोरी, बेहोशी और यहां तक कि हार्ट अटैक जैसी स्थिति भी बन सकती है।

कुछ लोगों के लिए डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, डायबिटीज या किडनी के मरीज और वे लोग जो हाई बीपी की दवाएं लेते हैं, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। खासतौर पर बुजुर्गों में प्यास का संकेत कम महसूस होता है, जिससे वे अनजाने में डिहाइड्रेशन का शिकार हो जाते हैं।

अगर किसी को हाई बीपी या दिल से जुड़ी बीमारी है, तो गर्मियों में अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है। दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लेते रहना चाहिए। तेज धूप में लंबे समय तक रहने से बचना चाहिए और शरीर को ठंडा रखने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही, डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं नियमित लेना और नमक-कैफीन का सेवन सीमित रखना भी जरूरी है।

डिहाइड्रेशन के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जैसे—गहरा पीला पेशाब, मुंह सूखना, चक्कर आना, थकान महसूस होना या दिल की धड़कन तेज होना। ऐसे लक्षण दिखते ही तुरंत छांव में जाएं, पानी या ORS का सेवन करें और जरूरत पड़ने पर मेडिकल मदद लें।

विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति को दिनभर में पर्याप्त पानी पीना चाहिए, लेकिन गर्मियों में यह मात्रा और बढ़ जाती है। सिर्फ पानी ही नहीं, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी और पानी से भरपूर फल जैसे तरबूज, खीरा और संतरा भी शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करते हैं। वहीं चाय और कॉफी जैसे पेय पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए, क्योंकि ये शरीर से पानी की मात्रा को और कम कर सकते हैं।

कुल मिलाकर, डिहाइड्रेशन एक साइलेंट खतरा है, जिसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है। खासकर जिन लोगों को पहले से ब्लड प्रेशर या हार्ट से जुड़ी समस्या है, उनके लिए गर्मियों में हाइड्रेशन बनाए रखना बेहद जरूरी है। सही आदतें अपनाकर इस खतरे से आसानी से बचा जा सकता है।

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