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सिर्फ इंदौर में केंद्र बनाना पड़ा भारी, MPPSC इंजीनियरिंग परीक्षा में 60% अभ्यर्थी रहे नदारद

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मध्य प्रदेश की राज्य इंजीनियरिंग परीक्षा-2025 इस बार अपने आयोजन से ज्यादा कम उपस्थिति को लेकर चर्चा में रही। Madhya Pradesh Public Service Commission द्वारा आयोजित इस परीक्षा में करीब 60 प्रतिशत अभ्यर्थी शामिल ही नहीं हुए, जिसने परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, इस परीक्षा के लिए लगभग 3,800 उम्मीदवारों ने आवेदन किया था, लेकिन परीक्षा देने के लिए केवल करीब 1,500 ही पहुंचे। इसकी सबसे बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि सभी परीक्षा केंद्र केवल Indore में बनाए गए थे। इससे राज्य के दूर-दराज जिलों से आने वाले अभ्यर्थियों को लंबी यात्रा और असुविधा का सामना करना पड़ा, जिसके चलते कई उम्मीदवारों ने परीक्षा छोड़ना ही बेहतर समझा।

हालांकि, कम उपस्थिति के बावजूद परीक्षा का आयोजन पूरी तरह शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से किया गया। सभी केंद्रों पर कड़ी निगरानी रखी गई और नकल जैसी किसी भी गड़बड़ी की कोई शिकायत सामने नहीं आई। परीक्षा दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक आयोजित हुई और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।

परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की दो स्तर पर जांच की गई। मोबाइल, स्मार्टवॉच जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों पर पूरी तरह प्रतिबंध था। साथ ही बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन के जरिए उम्मीदवारों की पहचान सुनिश्चित की गई, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।

प्रश्नपत्र को दो भागों में बांटा गया था। पहले भाग में सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे गए, जो अपेक्षाकृत आसान रहे। वहीं दूसरे भाग में तकनीकी विषयों—सिविल, मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग—से संबंधित सवाल शामिल थे, जिन्हें कई अभ्यर्थियों ने कठिन और समय लेने वाला बताया।

इस परीक्षा के जरिए कुल 32 पदों पर भर्ती की जानी है। आयोग जल्द ही आंसर की जारी करेगा और अप्रैल में परिणाम घोषित होने की संभावना है। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया के बीच सबसे बड़ा मुद्दा परीक्षा केंद्रों की व्यवस्था बनकर सामने आया है।

कई अभ्यर्थियों का मानना है कि अगर परीक्षा केंद्र अलग-अलग शहरों में बनाए जाते, तो उपस्थिति कहीं ज्यादा होती। केवल एक शहर में केंद्र सीमित करने का फैसला हजारों उम्मीदवारों के लिए बाधा बन गया और वे परीक्षा में शामिल ही नहीं हो सके।

कुल मिलाकर, परीक्षा का संचालन भले ही व्यवस्थित रहा हो, लेकिन कम उपस्थिति ने यह साफ संकेत दे दिया है कि भविष्य में ऐसी परीक्षाओं के लिए केंद्र चयन की नीति पर गंभीरता से पुनर्विचार करने की जरूरत है।

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