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बेदखली नोटिस से परेशान परिवार का आमरण अनशन, कुरुद तहसील के सामने बढ़ा तनाव

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छत्तीसगढ़ के Kurud क्षेत्र में एक परिवार न्याय की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठ गया है। ग्राम रावनगुड़ा के राजेंद्र मिरे और उनकी पत्नी ईश्वरीय मिरे ने पंचायत द्वारा मिले बेदखली नोटिस से परेशान होकर अपने परिवार सहित तहसील कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया है। यह मामला अब स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है।

पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनके साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है। राजेंद्र मिरे का कहना है कि गांव में कई अन्य लोग भी शासकीय जमीन पर खेती कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई केवल उनके परिवार के खिलाफ की जा रही है। लगातार मिल रहे नोटिसों ने उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर दिया, जिसके चलते उन्होंने आमरण अनशन जैसे कठोर कदम उठाने का निर्णय लिया।

इस आंदोलन को धीरे-धीरे समर्थन भी मिलने लगा है। Bahujan Samaj Party के जिलाध्यक्ष प्रदीप जांगड़े ने पीड़ित परिवार का समर्थन करते हुए कहा कि पंचायत की कार्रवाई एकतरफा प्रतीत होती है और सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए। वहीं बसपा नेता आशीष रात्रे ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सतनामी समाज के साथ हो रहे कथित अन्याय पर सवाल खड़े किए।

सिर्फ बसपा ही नहीं, बल्कि भाजपा से जुड़े स्थानीय नेता और समाज के अन्य लोग भी इस आंदोलन के समर्थन में सामने आए हैं। सतनामी समाज के प्रतिनिधि धन्नू जांगड़े सहित कई ग्रामीणों ने अनशन स्थल पर पहुंचकर परिवार के प्रति एकजुटता दिखाई।

अनशन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों की मौजूदगी से माहौल गंभीर होता जा रहा है। स्थानीय प्रशासन के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बनती जा रही है, क्योंकि एक ओर परिवार अपनी मांगों पर अड़ा है, वहीं दूसरी ओर बढ़ता जनसमर्थन इस आंदोलन को और मजबूत बना रहा है।

कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह समानता और न्याय की मांग से जुड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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