Meta Pixel

संजय वन वाटिका में खूनी हमला! 24 घंटे में 15 हिरणों की मौत से मचा हड़कंप, लापरवाही ने खड़ा किया बड़ा संकट

Spread the love

अम्बिकापुर का संजय वन वाटिका इन दिनों एक भयावह घटना के कारण चर्चा में है, जहां महज 24 घंटे के भीतर 15 हिरणों की दर्दनाक मौत ने पूरे वन विभाग और स्थानीय प्रशासन को झकझोर कर रख दिया है। आवारा कुत्तों के झुंड द्वारा किए गए इस हमले ने न सिर्फ वन्यजीवों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इस वाटिका के अस्तित्व पर भी खतरे के बादल मंडराने लगे हैं। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में हिरणों की मौत ने यह साफ कर दिया है कि कहीं न कहीं सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक हुई है, जिसकी कीमत इन बेजुबान जानवरों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी।

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए शासन ने तुरंत एक्शन लिया है। प्रमुख वन संरक्षक के निर्देश पर दो उच्च स्तरीय जांच समितियों का गठन किया गया है, जिनका नेतृत्व मुख्य वन संरक्षक (सामान्य) और मुख्य वन संरक्षक वाइल्ड लाइफ कर रहे हैं। इन समितियों को पूरे मामले की गहराई से जांच कर रिपोर्ट सौंपने का जिम्मा दिया गया है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही कैसे हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

इधर, सरगुजा वनमंडलाधिकारी अभिषेक जोगावत के नेतृत्व में पहले ही एक प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है। इस जांच रिपोर्ट में साफ तौर पर वनकर्मियों और वन प्रबंधन समिति की लापरवाही को इस हादसे का मुख्य कारण बताया गया है। रिपोर्ट के सामने आने के बाद विभाग ने सख्त कदम उठाते हुए वन प्रबंधन समिति शंकरघाट को तत्काल प्रभाव से वाटिका के संचालन से अलग कर दिया है। यह वही समिति थी जो वर्ष 2000 से लगातार वाटिका का संचालन कर रही थी और वन्यजीवों की देखरेख की जिम्मेदारी संभाल रही थी। लेकिन इस घटना ने उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मृत हिरणों के पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी इस मामले की भयावहता को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि सभी हिरणों की मौत आवारा कुत्तों के हमले के कारण हुई है। उनके गले और जांघों पर करीब 2 सेंटीमीटर गहरे घाव पाए गए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि हमला कितना हिंसक और खतरनाक था। इसके अलावा, मौत के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए हिरणों के बिसरे सुरक्षित रखे गए हैं और उन्हें जांच के लिए बरेली भेजा जाएगा। साथ ही, हिरणों को दिए जा रहे आहार के नमूनों को भी संरक्षित किया गया है, ताकि किसी अन्य संभावित कारण की भी जांच की जा सके।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद एक और बड़ी समस्या सामने आ गई है। फिलहाल संजय वन वाटिका को बंद कर दिया गया है, जिसके चलते हर दिन आने वाले सैकड़ों पर्यटक मायूस होकर लौट रहे हैं। वहीं, वनकर्मियों के निलंबन और प्रबंधन समिति को हटाए जाने के बाद वाटिका में रह रहे बाकी 16 हिरणों के साथ-साथ बड़ी संख्या में मोर, मोरनी और अन्य पशु-पक्षियों की देखभाल पर संकट गहरा गया है। उन्हें समय पर भोजन और पानी मिल पाएगा या नहीं, यह भी अब एक बड़ा सवाल बन गया है।

यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि अगर वन्यजीवों की सुरक्षा और प्रबंधन में थोड़ी भी ढिलाई बरती गई, तो इसके परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं। संजय वन वाटिका, जो कभी प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र था, आज खुद अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है। अब देखना यह होगा कि जांच रिपोर्ट के बाद क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं और क्या इस वाटिका को फिर से सुरक्षित और जीवंत बनाया जा सकेगा या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *