रामानुजगंज में आयोजित जिला संवाद कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने जिले के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ वर्षों में बलरामपुर जिला प्रदेश का सबसे विकसित और अग्रणी जिला बनकर उभरेगा। इस दौरान हरिभूमि-आईएनएच के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने उनसे विस्तार से बातचीत की, जिसमें विकास, राजनीति, अवैध कारोबार और व्यक्तिगत संघर्ष जैसे कई मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई।
अपने राजनीतिक सफर को याद करते हुए नेताम ने बताया कि उन्होंने 1990 के दशक में राजनीति की शुरुआत की थी, जब क्षेत्र बुनियादी सुविधाओं से पूरी तरह वंचित था। सड़क, पुल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतें भी लोगों के लिए एक सपना थीं। इन्हीं समस्याओं को देखकर उनके भीतर राजनीति में आने का संकल्प पैदा हुआ। उन्होंने कहा कि लोगों के भरोसे और सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की हार पर उन्होंने लोकतंत्र की प्रकृति का हवाला देते हुए कहा कि जनता का फैसला सर्वोपरि होता है। उनके मुताबिक, उस समय जनता ने कांग्रेस को मौका दिया, लेकिन पांच साल के कार्यकाल में भ्रष्टाचार और अव्यवस्था के कारण लोगों का भरोसा टूट गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार में गोठान से लेकर शराब, रेत और कोयले तक में अनियमितताएं हुईं, जिसका खामियाजा सरकारी खजाने को भुगतना पड़ा।
बलरामपुर जिले में अवैध रेत और कोयला कारोबार के सवाल पर नेताम ने स्पष्ट कहा कि किसी भी तरह का अवैध कार्य स्वीकार्य नहीं है और इस पर सख्ती से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि अब रेत घाटों का टेंडर, पर्यावरण अनुमति और वन विभाग की क्लीयरेंस जैसे सभी प्रक्रियाएं नियमों के तहत की जा रही हैं, जिससे राजस्व भी बढ़ रहा है और योजनाओं को गति मिल रही है।
अंबिकापुर से रामानुजगंज तक खराब सड़क को लेकर उठे सवाल पर उन्होंने स्वीकार किया कि यह समस्या गंभीर है, लेकिन समाधान की दिशा में काम जारी है। सड़क को नेशनल हाईवे में शामिल किया जा चुका है, टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और निर्माण कार्य चल रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि अगले छह महीनों में यह सड़क बनकर तैयार हो जाएगी।
जिले में योजनाओं के संतुलित विकास पर उन्होंने कहा कि बलरामपुर, रामानुजगंज सहित सभी क्षेत्रों को बराबर महत्व दिया जा रहा है। हालांकि जमीन की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है, क्योंकि पूरा क्षेत्र अनुसूचित क्षेत्र में आता है और वन अधिनियम के कारण कई बार परियोजनाएं अटक जाती हैं। उन्होंने बताया कि हॉर्टिकल्चर जैसी योजनाओं के लिए 80 एकड़ जमीन की तलाश जारी है और सरकार इस दिशा में समाधान निकालने का प्रयास कर रही है।
शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि रामानुजगंज में जल्द ही केंद्रीय विद्यालय खोला जाएगा। इस संबंध में केंद्र और राज्य स्तर पर चर्चा चल रही है। साथ ही ट्राइबल स्कूलों की स्थापना और कृषि विज्ञान केंद्र के लिए जमीन स्वीकृति जैसे कदम भी उठाए गए हैं।
भाजपा सरकार के दो साल के कार्यकाल पर उन्होंने कहा कि जनता का भरोसा ही सबसे बड़ी उपलब्धि है। विधानसभा से लेकर लोकसभा और नगरीय निकाय चुनावों में मिली जीत इस बात का संकेत है कि लोग सरकार के कामकाज से संतुष्ट हैं। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सक्रियता पर उन्होंने कहा कि मजबूत विपक्ष लोकतंत्र के लिए जरूरी होता है और इससे सरकार को बेहतर काम करने की प्रेरणा मिलती है।
अवैध अफीम खेती और बॉक्साइट उत्खनन पर उन्होंने दोहराया कि भाजपा सरकार में किसी भी अवैध गतिविधि को संरक्षण नहीं मिलेगा और दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी, चाहे वे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े हों।
आने वाले तीन वर्षों की योजनाओं पर बात करते हुए नेताम ने सिंचाई, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सुविधाओं को प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि जिले में खनिज और प्राकृतिक संसाधनों की प्रचुरता है, जो उद्योगों को आकर्षित कर सकती है और विकास को नई दिशा दे सकती है।
कार्यक्रम में अंबिकापुर के पूर्व महापौर डॉ. अजय तिर्की ने भी अपनी राय रखी और क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद अपेक्षित विकास नहीं हो पाया और अब ठोस काम की जरूरत है।
अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए रामविचार नेताम ने भावुक अंदाज में बताया कि एक समय ऐसा था जब वे साइकिल से ससुराल जाते थे और बेहद सीमित संसाधनों में राजनीति करते थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना पहला चुनाव मात्र डेढ़ लाख रुपये में जीता था, जो आज के समय में एक बूथ के खर्च के बराबर भी नहीं है।
कुल मिलाकर, यह संवाद कार्यक्रम सिर्फ एक राजनीतिक चर्चा नहीं रहा, बल्कि इसमें विकास के वादों, जमीनी हकीकत और भविष्य की रणनीतियों की झलक भी देखने को मिली। अब नजर इस बात पर है कि आने वाले समय में ये दावे कितनी हद तक जमीन पर उतर पाते हैं।