छत्तीसगढ़ में नए वित्तीय वर्ष से पहले शराब को लेकर एक बड़ा संकेत सामने आया है, जिसने उपभोक्ताओं के बीच राहत और उत्सुकता दोनों का माहौल बना दिया है। राज्य सरकार की तैयारियों के बीच यह लगभग तय माना जा रहा है कि 1 अप्रैल से शुरू होने वाले अगले एक साल तक देशी शराब की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं होगी। यानी जो लोग देशी शराब का सेवन करते हैं, उनके लिए फिलहाल जेब पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ेगा। लेकिन दूसरी ओर अंग्रेजी और विदेशी शराब को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह साफ नहीं है, जिससे बाजार में सस्पेंस बना हुआ है।
दरअसल, आबकारी विभाग ने नए वित्तीय वर्ष के लिए शराब के रेट तय करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। देशी शराब के लिए जिन कंपनियों से रेट ऑफर मांगे गए थे, उनमें पांच कंपनियों ने भाग लिया और जो दरें सामने आई हैं, वे पिछले साल के समान ही बताई जा रही हैं। विभाग ने इन रेट्स पर कंपनियों के साथ मोल-भाव भी किया है और यही वजह है कि संकेत मिल रहे हैं कि देशी शराब की कीमतों में किसी तरह का इजाफा नहीं होगा। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी शासन को भी भेज दी गई है, जिससे लगभग यह स्पष्ट हो चुका है कि देशी शराब के दाम स्थिर रहेंगे।
वहीं अंग्रेजी और विदेशी शराब की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। इस बार राज्य सरकार ने इन श्रेणियों के लिए ग्लोबल टेंडर आमंत्रित किए हैं, जिसमें करीब 90 ब्रांड्स के लिए देश-विदेश की कंपनियों ने अपने रेट ऑफर किए हैं। 25 मार्च को इन ऑफर्स को खोला जाएगा और उसके बाद कंपनियों के साथ बातचीत और मोल-भाव का दौर चलेगा। इसी प्रक्रिया के बाद यह तय होगा कि अंग्रेजी शराब के दाम बढ़ेंगे या स्थिर रहेंगे। अंतिम कीमतों में टैक्स और सेस जोड़ने के बाद ही उपभोक्ताओं के लिए वास्तविक दरें सामने आएंगी, जिसमें दो-तीन दिन का समय लग सकता है।
इस बीच राज्य सरकार ने शराब की पैकेजिंग को लेकर भी एक बड़ा बदलाव लागू करने का फैसला लिया है। 1 अप्रैल से शराब की बिक्री फाइबर बोतलों में करने की अनिवार्यता तय की गई है, जो देशी और अंग्रेजी दोनों पर लागू होगी। हालांकि अंग्रेजी और विदेशी शराब के लिए कांच की बोतल का विकल्प भी रखा गया है, लेकिन नई शर्तों के तहत सभी बोतलों पर प्लास्टिक का सीलिंग कैप होना जरूरी होगा। इस कैप के ऊपरी हिस्से पर अंग्रेजी में “CG EXCISE” उभरा हुआ रहेगा, जिससे नकली शराब पर नियंत्रण और निगरानी को मजबूत किया जा सके।
कुल मिलाकर छत्तीसगढ़ में शराब नीति को लेकर एक तरफ जहां देशी शराब उपभोक्ताओं को राहत मिलती दिख रही है, वहीं अंग्रेजी शराब के शौकीनों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना होगा। आने वाले फैसले न केवल कीमतों को प्रभावित करेंगे, बल्कि राज्य के राजस्व और बाजार की दिशा भी तय करेंगे।