छत्तीसगढ़ में एलपीजी गैस की कमी अब सिर्फ घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका सीधा असर उद्योगों पर भी दिखाई देने लगा है। खासकर स्टील सेक्टर इस समय गहरे संकट से गुजर रहा है। कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई लगभग ठप होने से प्रदेश की करीब 150 रोलिंग मीलों का काम प्रभावित हो रहा है।
जानकारी के मुताबिक, इन रोलिंग मीलों को हर महीने लगभग 3000 गैस सिलेंडरों की जरूरत होती है, लेकिन मौजूदा स्थिति यह है कि उन्हें एक भी सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिन इकाइयों के पास पहले से स्टॉक था, वह भी अब खत्म हो चुका है। पहले ब्लैक मार्केट के जरिए सिलेंडर लेकर किसी तरह काम चलाया जा रहा था, लेकिन अब वह रास्ता भी बंद हो गया है।
इस संकट का असर सीधे उत्पादन पर पड़ रहा है। पहले ही सिलेंडर की कमी के चलते करीब 30 फीसदी उत्पादन घट चुका है और अगर जल्द सप्लाई शुरू नहीं हुई, तो यह गिरावट और बढ़ सकती है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर एक सप्ताह के भीतर स्थिति नहीं सुधरी, तो उत्पादन पर गंभीर असर पड़ेगा।
गैस की कमी का सबसे बड़ा असर कटिंग प्रक्रिया पर पड़ रहा है। रोलिंग मीलों में कच्चे माल की कटिंग पूरी तरह गैस सिलेंडर पर निर्भर होती है। जब सिलेंडर ही नहीं मिल रहे, तो कटिंग का काम रुक रहा है, जिससे पूरी उत्पादन श्रृंखला प्रभावित हो रही है।
हालांकि, विकल्प के तौर पर ऑक्सीजन और डीए गैस का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह बेहद महंगा साबित हो रहा है। जहां एलपीजी सिलेंडर की कीमत करीब 2200 रुपए होती है, वहीं इस वैकल्पिक गैस का खर्च करीब ढाई गुना यानी लगभग 6000 रुपए तक पहुंच जाता है। इसके अलावा, इस गैस का उत्पादन प्रदेश में नहीं होता, जिससे इसकी उपलब्धता भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है।
स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि अब ब्लैक मार्केट में भी गैस सिलेंडर मिलना बंद हो गया है। पहले जहां चार से पांच हजार रुपए में सिलेंडर मिल जाते थे, अब सप्लायर्स ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं।
इसी संकट को देखते हुए रोलिंग मील एसोसिएशन ने प्रशासन से मदद की मांग करने का फैसला लिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय त्रिपाठी ने बताया कि वे कलेक्टर को विस्तृत डेटा सौंपेंगे, जिसमें हर उद्योग की जरूरत बताई जाएगी। उनकी मांग है कि कम से कम 50 फीसदी सिलेंडर की सप्लाई सुनिश्चित की जाए, ताकि उत्पादन पूरी तरह बंद न हो।
कुल मिलाकर, गैस संकट ने स्टील उद्योग की रीढ़ पर सीधा असर डाला है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो न केवल उत्पादन बल्कि रोजगार और सप्लाई चेन पर भी बड़ा असर देखने को मिल सकता है।