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ईरान संकट पर आज बड़ी बैठक: पीएम मोदी करेंगे मुख्यमंत्रियों से चर्चा

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देश और दुनिया में बढ़ते तनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi आज 27 मार्च को देश के मुख्यमंत्रियों के साथ एक अहम वर्चुअल बैठक करने जा रहे हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली इस मीटिंग में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष के भारत पर पड़ने वाले असर पर गंभीर चर्चा होने की संभावना है। खास बात यह है कि इस बैठक में केवल गैर-चुनावी राज्यों के मुख्यमंत्री ही शामिल होंगे, जिससे साफ है कि सरकार इस मुद्दे को पूरी तरह प्रशासनिक और रणनीतिक नजरिए से देख रही है।

प्रधानमंत्री पहले ही संसद में इस संकट को लेकर चेतावनी दे चुके हैं। राज्यसभा में उन्होंने साफ कहा था कि अगर ईरान का युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसके नतीजे बेहद गंभीर हो सकते हैं। उन्होंने आने वाले समय को “कोरोना काल जैसी बड़ी परीक्षा” बताया और जोर देकर कहा कि केंद्र और राज्यों को “टीम इंडिया” की तरह मिलकर काम करना होगा।

सरकार ने इस बीच देश में पेट्रोल, डीजल और गैस की किल्लत की खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास लगभग 60 दिनों का पर्याप्त ईंधन भंडार मौजूद है। सोशल मीडिया पर फैल रही कमी की खबरों को “प्रोपेगैंडा” बताते हुए सरकार ने चेतावनी दी है कि अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार का मानना है कि इस तरह की झूठी खबरों का मकसद बाजार में पैनिक बाइंग को बढ़ावा देना है।

इससे पहले हुई सर्वदलीय बैठक में विदेश मंत्री S. Jaishankar ने भी भारत की स्पष्ट नीति सामने रखी। उन्होंने कहा कि भारत किसी तीसरे देश की तरह मध्यस्थता करने वाला राष्ट्र नहीं है और अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर चलता है। यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए थे।

पश्चिम एशिया में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री रास्ते पर खतरा मंडरा रहा है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई गुजरती है। भारत भी अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी रूट से आयात करता है, ऐसे में इस संकट का असर सीधे देश की अर्थव्यवस्था, महंगाई और सप्लाई चेन पर पड़ सकता है।

सरकार पहले ही एलपीजी को लेकर कई सख्त कदम उठा चुकी है, जिसमें सिलेंडर बुकिंग पर लॉक-इन पीरियड लागू करना और पाइप गैस यूजर्स के लिए एलपीजी पर रोक जैसे फैसले शामिल हैं। ये सभी कदम बढ़ती मांग और संभावित संकट को संभालने के लिए उठाए गए हैं।

कुल मिलाकर, आज की बैठक सिर्फ एक औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि आने वाले संभावित संकट से निपटने की रणनीति तय करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर तालमेल ही इस चुनौतीपूर्ण दौर में देश को स्थिर बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा।

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