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“कोरबा ट्रिपल मर्डर केस में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: दो दोषी बरकरार, तीन को मिली राहत”

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छत्तीसगढ़ के चर्चित कोरबा ट्रिपल मर्डर केस में हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए न्यायिक प्रक्रिया में बड़ा मोड़ ला दिया है। इस सनसनीखेज मामले में जहां दो आरोपियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया है, वहीं तीन अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया है। इस फैसले के बाद एक बार फिर यह मामला चर्चा में आ गया है, जिसने साल 2021 में पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था।

यह मामला पूर्व डिप्टी सीएम और वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्यारे लाल कंवर के परिवार से जुड़ा हुआ है, जिसने उस समय राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तर पर हलचल मचा दी थी। निचली अदालत ने पहले इस मामले में पांचों आरोपियों को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी, लेकिन इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

हाईकोर्ट ने इस मामले की गहराई से सुनवाई करते हुए सभी साक्ष्यों और परिस्थितियों का पुनर्मूल्यांकन किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने पाया कि दो आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद हैं, जिससे उनकी सजा को बरकरार रखा गया। वहीं तीन अन्य आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं मिले, जिसके चलते उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया।

यह दर्दनाक घटना साल 2021 में सामने आई थी, जब प्यारे लाल कंवर के बेटे हरीश कंवर, उनकी पत्नी और उनकी चार साल की मासूम बेटी की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। इस तिहरे हत्याकांड ने कोरबा ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश को हिला दिया था। इस वारदात की भयावहता और इसके पीछे छिपे पारिवारिक कारणों ने लोगों को लंबे समय तक विचलित रखा।

जांच के दौरान सामने आया था कि इस हत्याकांड की जड़ परिवार के भीतर चल रहा जमीन और मुआवजे का विवाद था। आरोप यह भी लगा कि इस साजिश को अंजाम देने में परिवार के ही कुछ करीबी लोग शामिल थे, जिन्होंने मिलकर इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया। इसी आधार पर निचली अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी करार दिया था।

हालांकि, हाईकोर्ट में अपील के बाद मामला नए सिरे से परखा गया और कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि न्याय केवल आरोपों के आधार पर नहीं, बल्कि ठोस सबूतों के आधार पर ही दिया जा सकता है। यही वजह रही कि जहां दोष सिद्ध हुआ, वहां सजा बरकरार रही और जहां संदेह रहा, वहां राहत मिल गई।

इस फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि न्यायिक प्रक्रिया में हर पहलू की बारीकी से जांच होती है और अंतिम फैसला तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर ही लिया जाता है। अब इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई और संभावित अपीलों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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