हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए एक बड़े झटके के साथ हुई, जहां सोमवार को बाजार खुलते ही निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। सुबह के शुरुआती कारोबार में ही माहौल पूरी तरह नकारात्मक नजर आया और बिकवाली का दबाव इतना ज्यादा रहा कि प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में गहरे उतर गए। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स करीब 1000 अंकों की गिरावट के साथ 72,565 के स्तर पर खुला, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 267 अंक टूटकर 22,549 पर पहुंच गया। यह गिरावट केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसके पीछे वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और निवेशकों की कमजोर होती भावना साफ दिखाई दी।
दरअसल, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में तेजी से बिगड़ते हालात हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया के बाजारों को अस्थिर कर दिया है। हाल ही में ईरान द्वारा इजरायल के एक केमिकल प्लांट पर हमला और उसके जवाब में इजरायल की जवाबी कार्रवाई ने हालात को और ज्यादा गंभीर बना दिया है। यही कारण है कि निवेशकों में डर का माहौल बना हुआ है और वे जोखिम लेने से बचते नजर आ रहे हैं। इस भू-राजनीतिक तनाव का असर यह हुआ है कि पिछले एक महीने में ही प्रमुख इंडेक्स करीब 10% तक गिर चुके हैं।
अगर सेक्टर वाइज बात करें तो आज का दिन लगभग हर सेक्टर के लिए निराशाजनक रहा। PSU बैंक और केमिकल सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित दिखे, जहां 3 से 4 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। इसके अलावा रियल्टी, ऑटो और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर भी बिकवाली की चपेट में रहे और इनमें भी लगभग 3 प्रतिशत तक की कमजोरी देखने को मिली। चौंकाने वाली बात यह रही कि जिन सेक्टर्स को आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है, जैसे FMCG, IT और फार्मा, वे भी इस गिरावट से खुद को बचा नहीं पाए और इनमें भी 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई। यानी बाजार में कोई भी ऐसा सेगमेंट नहीं बचा, जहां निवेशकों को राहत मिली हो।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच एक और चिंता बढ़ाने वाली बात कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज उछाल है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 3.66 प्रतिशत बढ़कर 116.70 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जो इस साल के उच्चतम स्तर के करीब है। वहीं WTI क्रूड भी 103 डॉलर के पार ट्रेड कर रहा है। भारत जैसे देश, जो तेल का बड़ा आयातक है, उसके लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन जाती है। महंगे होते तेल का सीधा असर महंगाई, रुपये की मजबूती और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है, जिससे बाजार पर दबाव और बढ़ सकता है।
ग्लोबल संकेत भी इस गिरावट को और मजबूत कर रहे हैं। अमेरिकी बाजारों में भी कमजोरी साफ देखने को मिली, जहां S&P 500 में करीब 1.67 प्रतिशत और Nasdaq में 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। एशियाई बाजारों में जापान का निक्केई 4 प्रतिशत तक टूट गया, जबकि हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार भी लाल निशान में बंद हुए। यह साफ संकेत है कि यह गिरावट केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा डगमगा रहा है।
आने वाले समय को लेकर बाजार विशेषज्ञ भी फिलहाल सतर्क नजर आ रहे हैं। उनका मानना है कि निफ्टी के लिए 22,450 से 22,500 का स्तर एक महत्वपूर्ण सपोर्ट के रूप में काम कर सकता है, जबकि 22,950 से 23,000 के बीच मजबूत रेजिस्टेंस बना हुआ है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले शेयरों पर ही ध्यान देना चाहिए। नई खरीदारी के लिए भी विशेषज्ञ तब तक इंतजार करने की सलाह दे रहे हैं, जब तक निफ्टी 24,000 के स्तर को मजबूती से पार न कर ले।
कुल मिलाकर, बाजार फिलहाल डर और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है, जहां हर खबर निवेशकों की रणनीति बदल रही है। ऐसे समय में संयम और समझदारी ही सबसे बड़ी ताकत बन सकती है।