छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले से एक दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है, जहां मामूली रकम और मोबाइल पासवर्ड के विवाद ने दोस्ती को खून में बदल दिया। यहां दो युवकों ने अपने ही करीबी दोस्त की बेरहमी से हत्या कर दी। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि छोटी-छोटी बातों पर बढ़ता गुस्सा किस तरह जानलेवा बनता जा रहा है।
मालखरौदा थाना क्षेत्र के बंदोरा गांव में 28 मार्च की शाम यह खौफनाक घटना सामने आई। मृतक राहुल कुर्मी, जो गांव में “राहुल ऑटो” के नाम से धुलाई मशीन सेंटर चलाता था, सुबह मजदूर ढूंढने के लिए निकला था। दिन ढलते-ढलते उसकी लाश उसके ही घर के पास मिली, जिसे देखकर परिजनों के होश उड़ गए। गले पर दबाव के निशान और सिर पर गंभीर चोटें इस बात की गवाही दे रही थीं कि उसकी हत्या बेहद क्रूर तरीके से की गई है।
जांच में सामने आया कि इस हत्या के पीछे कोई बाहरी दुश्मन नहीं, बल्कि उसके अपने ही दोस्त थे। इंद्र कुमार गबेल और नारायण यादव, जो उसके साथ अक्सर उठते-बैठते थे, उसी दिन उससे मिलने पहुंचे थे। इंद्र ने राहुल से अपने 1800 रुपए वापस मांगे, जो उसे शक था कि राहुल ने उसकी जेब से निकाल लिए हैं। वहीं, मोबाइल का फेस पासवर्ड बदलने की बात भी विवाद की वजह बनी। नारायण को भी शक था कि उसके भाई का मोबाइल राहुल ने ही चुराया है।
इन आरोपों को लेकर तीनों के बीच बहस शुरू हुई, जो देखते ही देखते हिंसक झगड़े में बदल गई। गुस्से में अंधे दोनों आरोपियों ने पहले राहुल का कपड़े से गला घोंटना शुरू कर दिया। लंबे समय तक गला दबाने के बाद भी जब राहुल की सांसें चल रही थीं और वह छटपटा रहा था, तब इंद्रकुमार गबेल ने बेरहमी की सारी हदें पार करते हुए उसके सिर और चेहरे पर ईंट से ताबड़तोड़ वार कर दिए। इस हमले ने राहुल की जिंदगी छीन ली।
घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। जांच के दौरान पुलिस ने संदेह के आधार पर दोनों आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। उन्होंने बताया कि पैसे और मोबाइल पासवर्ड के विवाद ने उन्हें इतना गुस्सा दिलाया कि उन्होंने हत्या जैसा खौफनाक कदम उठा लिया।
पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को 29 मार्च को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है, क्योंकि जिस दोस्ती पर भरोसा था, वही दोस्त मौत का कारण बन गए।
यह मामला केवल एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि समाज में बढ़ती असहिष्णुता और गुस्से की खतरनाक प्रवृत्ति का आईना है, जहां छोटी-सी बात भी जान लेने तक पहुंच जाती है।