सप्ताह की शुरुआत सर्राफा बाजार के लिए निराशाजनक साबित हुई, जहां सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। जैसे ही बाजार खुला, निवेशकों को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा और कीमती धातुओं में बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। इस गिरावट के पीछे वैश्विक बाजार की कमजोरी, बढ़ती महंगाई की आशंका और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों में कमी को मुख्य कारण माना जा रहा है।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर जून डिलीवरी वाला सोना पहले ही कमजोर शुरुआत के साथ 1,46,850 रुपये प्रति 10 ग्राम पर खुला, जो पिछले बंद भाव से नीचे था। हालांकि, दिन बढ़ने के साथ गिरावट और गहरी होती गई और सोना करीब 3,043 रुपये यानी 2.06 प्रतिशत टूटकर 1,44,212 रुपये प्रति 10 ग्राम के इंट्राडे निचले स्तर तक पहुंच गया। यह गिरावट निवेशकों के लिए एक बड़ा झटका साबित हुई।
चांदी भी इस गिरावट से अछूती नहीं रही। मई डिलीवरी वाली सिल्वर फ्यूचर्स में भी कमजोरी देखने को मिली और यह करीब 0.96 प्रतिशत गिरकर 2,25,763 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। इससे पहले इसका बंद भाव 2,27,954 रुपये था, जो यह दिखाता है कि बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार की बात करें तो वहां भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। स्पॉट गोल्ड करीब 1.61 प्रतिशत गिरकर 4,420.48 डॉलर प्रति औंस पर आ गया, जबकि स्पॉट सिल्वर में करीब 3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 67.69 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। इसी तरह COMEX गोल्ड और सिल्वर में भी गिरावट का रुख बना रहा, जो इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का भरोसा कमजोर हो रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ऊर्जा कीमतों को ऊपर धकेल दिया है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका और गहरी हो गई है। महंगाई के इस दबाव के चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती करना मुश्किल हो सकता है, और यही कारण है कि सोने-चांदी जैसी सुरक्षित मानी जाने वाली संपत्तियों पर भी दबाव देखने को मिल रहा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस महीने अब तक सोना करीब 15 प्रतिशत तक गिर चुका है, जो अक्टूबर 2008 के बाद की सबसे बड़ी मासिक गिरावट मानी जा रही है। वहीं, चांदी अपने मार्च के उच्च स्तर से करीब 30 प्रतिशत तक टूट चुकी है, जो बाजार की कमजोरी को और स्पष्ट करता है।
आने वाले दिनों को लेकर भी तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। विश्लेषकों का कहना है कि फिलहाल सोना और चांदी दोनों में दबाव बना रह सकता है और इनकी दिशा वैश्विक आर्थिक संकेतों, ब्याज दरों के फैसलों और भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। ऐसे माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी से बचने और सोच-समझकर कदम उठाने की सलाह दी जा रही है।
कुल मिलाकर, सर्राफा बाजार इस समय अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है, जहां हर छोटी-बड़ी खबर कीमतों को तेजी से प्रभावित कर रही है।