छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर अपराध के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। मोहन नगर थाना क्षेत्र में हुई इस कार्रवाई में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो अपने बैंक खातों को किराए पर देकर ठगी के पैसों का लेन-देन करवा रहे थे। इस पूरे रैकेट में 111 बैंक खातों के जरिए करीब 86 लाख रुपये से अधिक का ट्रांजेक्शन किया गया था।
मामले की शुरुआत तब हुई जब Indian Cyber Crime Coordination Centre से संदिग्ध बैंक खातों की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने दुर्ग स्टेशन रोड स्थित कर्नाटक बैंक की शाखा में सक्रिय इन खातों की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि देशभर के अलग-अलग हिस्सों में लोगों से ठगी गई रकम इन खातों में जमा कर निकाली जा रही थी।
पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ कि इन खातों के माध्यम से कुल 86,33,247 रुपये का अवैध लेन-देन किया गया है। यह रकम अलग-अलग राज्यों से साइबर ठगी के जरिए जुटाई गई थी और फिर इन “म्यूल अकाउंट्स” के जरिए घुमाई जा रही थी।
दरअसल, साइबर अपराधी अक्सर ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं, जो थोड़े पैसे के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या पासबुक दूसरों को इस्तेमाल करने के लिए दे देते हैं। इसी तरह के खातों को “म्यूल अकाउंट” कहा जाता है, जिनका इस्तेमाल ठगी के पैसों को छिपाने और ट्रांसफर करने में किया जाता है।
दुर्ग में गिरफ्तार किए गए आरोपी भी इसी लालच में फंसकर इस नेटवर्क का हिस्सा बन गए थे। पुलिस ने 24 साल से लेकर 56 साल तक की उम्र के 10 लोगों को पकड़ा है। इनके पास से बैंक दस्तावेज, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूत भी बरामद किए गए हैं।
सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है, जिससे इस रैकेट की पूरी जड़ तक पहुंचा जा सके।
पुलिस ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, ओटीपी या पासबुक न दें। थोड़े से लालच में उठाया गया यह कदम आपको भी अपराधी बना सकता है।
यह कार्रवाई न सिर्फ साइबर अपराधियों के लिए एक सख्त संदेश है, बल्कि आम लोगों के लिए भी एक चेतावनी है कि सतर्क रहें और अपने वित्तीय विवरण किसी के साथ साझा न करें।