Comptroller and Auditor General of India की डिफेंस से जुड़ी ताजा रिपोर्ट ने कई अहम कमियों को सामने लाकर चिंता बढ़ा दी है। संसद में पेश इस रिपोर्ट में बताया गया है कि बड़ी संख्या में सेना के जवानों को समय पर वेतन और भत्ते नहीं मिले, वहीं मिलिट्री अस्पतालों की हालत और रखरखाव को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, वेतन और भत्तों के भुगतान से जुड़े सिस्टम में खामियां हैं, जिसके कारण कई जवानों को सही समय पर भुगतान नहीं हो पाया। आईटी सिस्टम में जरूरी नियमों की कमी और अलग-अलग प्लेटफॉर्म के बीच तालमेल की कमी इसका मुख्य कारण बताई गई है। इसके चलते कई मामलों में रिटायरमेंट के समय अधिकारियों और जवानों से एक साथ बड़ी रकम की वसूली भी करनी पड़ी।
ऑडिट में यह भी सामने आया कि छुट्टी पर जाने के लिए मिलने वाले प्रिविलेज टिकट ऑर्डर (PTO) जारी करने में देरी हो रही है। HRMS सिस्टम में जानकारी सही तरीके से अपडेट न होने के कारण कई आवेदन खारिज हो रहे हैं। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि इन सभी सिस्टम्स के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए और रिजेक्ट मामलों की निगरानी के लिए ऑटोमेटेड व्यवस्था विकसित की जाए।
निर्माण कार्यों को लेकर भी रिपोर्ट में गंभीर खामियां बताई गई हैं। सेना के निर्माण कार्यों से जुड़े साइट रिकॉर्ड्स ठीक से मेंटेन नहीं किए गए, जिससे काम की गुणवत्ता और ठेकेदार की जवाबदेही तय करना मुश्किल हो गया। CAG ने सिफारिश की है कि इन रिकॉर्ड्स को डिजिटल किया जाए, ताकि पारदर्शिता और निगरानी बेहतर हो सके।
मिलिट्री अस्पतालों की स्थिति भी रिपोर्ट में चिंताजनक बताई गई है। कई अस्पतालों की इमारतें पुरानी हैं, लेकिन उनकी नियमित जांच नहीं हुई। कुछ जगहों पर HVAC और फायरफाइटिंग सिस्टम अधूरे पाए गए। यहां तक कि कुछ अस्पतालों में बिना लाइसेंस X-ray मशीनें चल रही थीं और बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों का भी पालन नहीं किया जा रहा था।
दवाओं की आपूर्ति में भी कमी सामने आई है। आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल स्टोर्स डिपो (AFMSD) जरूरत के मुताबिक दवाएं उपलब्ध नहीं करा पाया, जिससे कई जरूरी दवाओं की कमी बनी रही। वहीं कुछ जगहों पर समय पर दवाओं को बदलने में लापरवाही के कारण करीब 13.52 करोड़ रुपये की दवाएं फंस गईं।
सात सैन्य कमांड्स की समीक्षा में वेस्टर्न कमांड में सबसे ज्यादा नियमों का उल्लंघन पाया गया। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि रक्षा मंत्रालय ने कुछ सुधारात्मक कदम उठाने शुरू किए हैं, लेकिन अभी भी कई समस्याएं बनी हुई हैं, जिन पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है।
कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट सेना से जुड़े प्रशासनिक और स्वास्थ्य तंत्र में सुधार की जरूरत को उजागर करती है। डिजिटल सिस्टम, बेहतर निगरानी और समय पर कार्रवाई से ही इन खामियों को दूर किया जा सकता है।