छत्तीसगढ़ के शिक्षा तंत्र से एक बड़ी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है, जहां प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत लगभग 1.93 लाख शिक्षकों में से करीब 80 हजार शिक्षक शिक्षक पात्रता परीक्षा यानी TET को अब तक पास नहीं कर पाए हैं। यह स्थिति केवल एक परीक्षा में असफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि इन शिक्षकों के भविष्य, पदोन्नति और करियर पर सीधे असर डाल रही है। हाल ही में व्यापम द्वारा आयोजित TET परीक्षा के परिणाम जारी होने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि बड़ी संख्या में पहले से कार्यरत शासकीय शिक्षक इस परीक्षा में सफल नहीं हो सके।
इस घटनाक्रम ने शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच नई चिंता को जन्म दे दिया है। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस गंभीर स्थिति को देखते हुए जिलों से उन शिक्षकों का डाटा मांगा है जिनके लिए TET अनिवार्य है, लेकिन उन्होंने इसे अभी तक क्वालिफाई नहीं किया है। हालांकि विभागीय स्तर पर एक अलग TET परीक्षा आयोजित करने की चर्चा जरूर चल रही है, लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय या आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।
अगर आंकड़ों की बात करें तो प्रदेश के कुल शिक्षकों में से लगभग 42 प्रतिशत शिक्षक TET क्वालिफाई नहीं हैं। यह आंकड़ा अपने आप में बताता है कि समस्या कितनी बड़ी है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में पहले भी विभागीय परीक्षाओं का आयोजन होता रहा है, जिससे शिक्षकों को प्रमोशन में लाभ मिला है। डीएड परीक्षा के जरिए जहां सभी शिक्षक लाभान्वित हुए, वहीं सहायक शिक्षक से सीधे व्याख्याता बनने के लिए भी विभागीय परीक्षा का रास्ता अपनाया गया था। ऐसे में अब शिक्षक उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार फिर से ऐसा ही कोई विकल्प प्रदान करेगी।
जिलावार स्थिति पर नजर डालें तो राजधानी रायपुर में सबसे कम 376 शिक्षक ऐसे हैं जो TET पास नहीं कर सके हैं, जबकि कोंडागांव इस सूची में सबसे ऊपर है जहां 5334 शिक्षक अब भी TET में सफल नहीं हुए हैं। महासमुंद में 4486, बलौदाबाजार-भाटापारा में 4535, सरगुजा में 4328, रायगढ़ में 4207 और सूरजपुर में 4151 शिक्षक इस परीक्षा को पास नहीं कर पाए हैं। दुर्ग जिले में 2756, बिलासपुर में 1020, धमतरी में 3053, गरियाबंद में 3340, जांजगीर-चांपा में 3164 और बलरामपुर में 3830 शिक्षक अभी भी TET की बाधा से जूझ रहे हैं।
इस पूरे मामले पर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेशाध्यक्ष संजय शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और NCTE के दिशा-निर्देशों के अनुसार TET अब अनिवार्य हो चुका है, जिससे देशभर के शिक्षक दबाव में हैं। यही कारण है कि छत्तीसगढ़ में 80 हजार से अधिक शिक्षकों ने इस परीक्षा में भाग लिया, लेकिन सफलता दर अपेक्षा के अनुसार नहीं रही। शिक्षक संघ लगातार यह मांग कर रहा है कि विभागीय स्तर पर TET का आयोजन किया जाए, ताकि व्यापम के अलावा भी शिक्षकों को एक और मौका मिल सके।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार इन 80 हजार शिक्षकों के भविष्य को देखते हुए कोई राहत भरा फैसला लेगी या फिर ये शिक्षक लंबे समय तक पदोन्नति से वंचित रहेंगे। फिलहाल स्थिति अनिश्चित बनी हुई है, लेकिन इतना जरूर है कि यह मुद्दा आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था और सरकारी नीतियों पर बड़ा असर डाल सकता है।