बुधवार की सुबह भारतीय शेयर बाजार ने ऐसी रफ्तार पकड़ी जिसने निवेशकों के चेहरे पर फिर से मुस्कान ला दी। पिछले कारोबारी सत्र की गिरावट के बाद बाजार ने जिस तरह वापसी की, उसने साफ कर दिया कि वैश्विक संकेत अब फिर से भारतीय बाजार के पक्ष में खड़े दिखाई दे रहे हैं।
सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ने शुरुआत से ही मजबूती दिखाई। सेंसेक्स लगभग 1,900 अंकों की छलांग लगाकर 73,800 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 22,900 के करीब पहुंच गया। यह तेजी सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं थी, बल्कि बाजार के हर सेक्टर और लगभग सभी बड़ी कंपनियों में खरीदारी का माहौल दिखाई दिया।
इस तेजी की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बने सकारात्मक संकेत रहे। खासतौर पर अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव में नरमी के संकेतों ने निवेशकों को राहत दी। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने यह उम्मीद जताई कि यह विवाद जल्द ही समाप्त हो सकता है। वहीं ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने भी शांति की दिशा में आगे बढ़ने की इच्छा जाहिर की है। इन बयानों ने वैश्विक बाजारों में भरोसा बढ़ाया और इसका सीधा असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा।
एशियाई बाजारों में भी उत्साह साफ दिखाई दिया। जापान का Nikkei 225, दक्षिण कोरिया का KOSPI, चीन का Shanghai Composite और हांगकांग का Hang Seng Index—सभी में तेजी दर्ज की गई। वहीं अमेरिकी बाजार में भी NASDAQ Composite, S&P 500 और Dow Jones Industrial Average ने मजबूत प्रदर्शन किया।
भारतीय बाजार में भी लगभग सभी दिग्गज कंपनियों के शेयरों में उछाल देखा गया। खासतौर पर Adani Ports, Bajaj Finance, InterGlobe Aviation और Larsen & Toubro जैसे शेयर निवेशकों की पहली पसंद बने रहे। इस व्यापक खरीदारी ने बाजार को और मजबूती दी।
रुपये में भी मजबूती देखने को मिली, जो डॉलर के मुकाबले थोड़ा मजबूत हुआ। यह संकेत देता है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा धीरे-धीरे वापस लौट रहा है। हालांकि, आंकड़े बताते हैं कि विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हाल ही में बड़ी मात्रा में बिकवाली की थी, लेकिन घरेलू निवेशकों ने उस दबाव को संतुलित कर लिया।
फिर भी, बाजार के सामने कुछ चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं। सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें हैं। खासकर Strait of Hormuz को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है। ब्रेंट क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जो आने वाले समय में महंगाई को और बढ़ा सकता है।
वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव भी एक बड़ी चिंता बना हुआ है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें चार साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं, जबकि यूरोप में भी सरकारें महंगाई को काबू में रखने के लिए लगातार कदम उठा रही हैं।
कुल मिलाकर, बुधवार का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए उम्मीदों से भरा रहा। वैश्विक तनाव में कमी के संकेत और सकारात्मक अंतरराष्ट्रीय माहौल ने बाजार को नई ऊर्जा दी है। हालांकि, तेल की कीमतें और महंगाई जैसे जोखिम अभी भी बने हुए हैं, जिन पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।