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IT नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित, सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ेगी जिम्मेदारी

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केंद्र सरकार ने डिजिटल दुनिया को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए आईटी नियम-2021 में संशोधन का नया मसौदा जारी किया है। इस प्रस्तावित बदलाव के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नियम पहले से कहीं ज्यादा सख्त हो सकते हैं और उनकी जवाबदेही भी बढ़ने वाली है।

सबसे बड़ा बदलाव यह है कि अब सोशल मीडिया कंपनियों को सरकार के निर्देशों, गाइडलाइंस और एडवाइजरी का पालन करना अनिवार्य होगा। यदि कोई प्लेटफॉर्म इन निर्देशों की अनदेखी करता है, तो उसे मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour खत्म की जा सकती है। इसका मतलब साफ है—अब यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट की जिम्मेदारी सीधे प्लेटफॉर्म पर आ सकती है।

अब तक की व्यवस्था में सोशल मीडिया कंपनियों को एक तरह की कानूनी ढाल मिली हुई थी, जिसके तहत वे यूजर्स के कंटेंट के लिए सीधे जिम्मेदार नहीं मानी जाती थीं। लेकिन नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद यह स्थिति बदल सकती है। यानी अगर कोई आपत्तिजनक या कानून के खिलाफ कंटेंट प्लेटफॉर्म पर मौजूद है, तो उसकी जवाबदेही कंपनी को उठानी पड़ सकती है।

नए मसौदे में डेटा से जुड़ा एक और अहम प्रावधान जोड़ा गया है। इसके तहत यदि किसी अन्य कानून—जैसे टैक्स, वित्तीय जांच या अन्य कानूनी मामलों—में डेटा सुरक्षित रखना जरूरी है, तो सोशल मीडिया कंपनियां उसे डिलीट नहीं कर पाएंगी। इससे जांच एजेंसियों को जरूरी जानकारी सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।

इसके अलावा, डिजिटल मीडिया एथिक्स कोड के दायरे को भी बढ़ाने का प्रस्ताव है। पहले यह कोड केवल न्यूज पब्लिशर्स पर लागू होता था, लेकिन अब सोशल मीडिया पर न्यूज या करंट अफेयर्स से जुड़े पोस्ट करने वाले यूजर्स भी इसके दायरे में आ सकते हैं। यानी अब आम यूजर्स पर भी नियमों का असर पड़ेगा।

सरकार को यह अधिकार भी देने का प्रस्ताव है कि वह किसी भी कंटेंट को सीधे समीक्षा कमेटी के पास भेज सके, बिना किसी औपचारिक शिकायत के इंतजार के। इससे कंटेंट मॉनिटरिंग और नियंत्रण की प्रक्रिया तेज हो सकती है।

हालांकि, इन प्रस्तावित बदलावों को लेकर विरोध भी शुरू हो गया है। Internet Freedom Foundation ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संभावित खतरा बताया है। उनका कहना है कि इससे ऑनलाइन कंटेंट पर सेंसरशिप बढ़ सकती है और सरकार आलोचनात्मक या व्यंग्यात्मक कंटेंट को नियंत्रित करने की कोशिश कर सकती है।

फिलहाल सरकार ने इस मसौदे पर 14 अप्रैल तक आम जनता से सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इसके बाद ही अंतिम नियमों को लागू किया जाएगा।

कुल मिलाकर, ये प्रस्तावित बदलाव डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की कार्यप्रणाली और यूजर्स के ऑनलाइन व्यवहार—दोनों पर बड़ा असर डाल सकते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इन नियमों का अंतिम स्वरूप क्या होता है और यह इंटरनेट की आज़ादी और जवाबदेही के बीच संतुलन कैसे बनाता है।

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