छत्तीसगढ़ के चर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड में न्यायिक प्रक्रिया एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। बुधवार 1 अप्रैल को इस मामले की सुनवाई Chhattisgarh High Court में चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली डिविजन बेंच के सामने हुई, जहां अहम दलीलें रखी गईं।
सुनवाई के दौरान आरोपी Amit Jogi की ओर से पेश वकील ने कोर्ट से अतिरिक्त समय की मांग की। कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए सिर्फ एक दिन का समय दिया और साफ कर दिया कि अब इस मामले में 2 अप्रैल को अंतिम सुनवाई होगी। इससे यह संकेत मिल रहा है कि अदालत इस लंबे समय से लंबित मामले को जल्द निष्कर्ष तक पहुंचाना चाहती है।
यह मामला वर्ष 2003 का है, जब राकांपा नेता राम अवतार जग्गी की राजधानी रायपुर में दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। बाद में 2007 में इस मामले में 28 लोगों को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।
हालांकि, इस केस में एक बड़ा मोड़ तब आया जब पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे Amit Jogi को अदालत ने बरी कर दिया था। लेकिन अब यह मामला फिर से चर्चा में है, क्योंकि Supreme Court of India के निर्देश पर इसे दोबारा खोला गया है।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील को स्वीकार करते हुए इस केस की दोबारा सुनवाई के लिए इसे छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजा था। इससे पहले डिवीजन बेंच दोषियों की अपील खारिज कर चुकी थी और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा गया था।
अब जब अंतिम सुनवाई की तारीख तय हो चुकी है, तो इस बहुचर्चित हत्याकांड में एक बार फिर सभी की नजरें अदालत के फैसले पर टिक गई हैं। आने वाला निर्णय इस केस की दिशा और प्रदेश की राजनीति दोनों पर असर डाल सकता है।