1 अप्रैल 2026 से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ ही देश में कई बड़े बदलाव लागू हो गए हैं, जिनका सीधा असर आम लोगों की जेब और रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। सबसे बड़ा बदलाव टैक्स सिस्टम में देखने को मिला है, जहां छह दशक पुराने कानून की जगह अब नया आयकर ढांचा लागू कर दिया गया है।
अब तक लागू Income Tax Act 1961 की जगह नया Income Tax Act 2025 प्रभावी हो गया है। सरकार का दावा है कि इससे टैक्स सिस्टम ज्यादा सरल, पारदर्शी और डिजिटल बनेगा। टैक्स फाइलिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के साथ ही अब कई नियमों को स्पष्ट किया गया है, जिससे करदाताओं की उलझन कम होगी।
नए वित्तीय वर्ष के साथ सैलरी स्ट्रक्चर में भी बड़ा बदलाव आया है। नए लेबर नियमों के तहत अब कर्मचारियों की बेसिक सैलरी उनके कुल वेतन का कम से कम 50% होना अनिवार्य कर दिया गया है। इसका असर यह होगा कि कर्मचारियों के पीएफ और ग्रेच्युटी में योगदान बढ़ेगा, लेकिन हर महीने हाथ में आने वाली सैलरी कम हो सकती है।
बैंकिंग सेक्टर में भी बदलाव लागू हो गए हैं। HDFC Bank समेत कई बैंकों ने एटीएम से कैश निकालने के नियमों में संशोधन किया है। अब तय सीमा से ज्यादा ट्रांजैक्शन करने पर प्रति निकासी शुल्क देना होगा, जिससे कैश निकालना पहले से महंगा हो गया है।
हाईवे पर सफर करने वालों के लिए भी नियम बदले हैं। FASTag से जुड़े सालाना पास की कीमत बढ़ा दी गई है और टोल सिस्टम को और ज्यादा डिजिटल बनाया जा रहा है। इसके साथ ही रेलवे टिकट बुकिंग और रिफंड प्रक्रिया में भी सुधार किए गए हैं, ताकि यात्रियों को ज्यादा पारदर्शिता और सुविधा मिल सके।
टैक्स और पहचान से जुड़े नियमों में भी सख्ती बढ़ी है। PAN और ITR फाइलिंग के लिए अब ज्यादा दस्तावेजी प्रमाण जरूरी होंगे। खासतौर पर HRA जैसी छूट के लिए अब सही कागजी सबूत देना अनिवार्य हो गया है। नियमों की अनदेखी करने पर जुर्माना भी लग सकता है।
कुल मिलाकर, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत आम आदमी के लिए कई बदलाव लेकर आई है—कुछ राहत देने वाले हैं, तो कुछ सीधे खर्च बढ़ाने वाले। ऐसे में जरूरी है कि आप इन नए नियमों को समझें और अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग उसी हिसाब से करें।