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21 साल पुराने जग्गी हत्याकांड में बड़ा फैसला, अमित जोगी दोषी करार, 3 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

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छत्तीसगढ़ की राजनीति को लंबे समय से झकझोरते आ रहे चर्चित जग्गी हत्याकांड में अब एक बड़ा मोड़ आ गया है। Amit Jogi को हाईकोर्ट ने दोषी करार देते हुए तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश दिया है। यह फैसला चीफ जस्टिस Ramesh Sinha की डिवीजन बेंच ने सुनाया, जिससे प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

यह मामला साल 2003 में हुई Ramavatar Jaggi की हत्या से जुड़ा है, जिसे उस समय राजनीतिक गलियारों में बड़ा हत्याकांड माना गया था। रायपुर में दिनदहाड़े गोली मारकर की गई इस हत्या ने पूरे राज्य को हिला दिया था।

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान CBI द्वारा पेश की गई करीब 11 हजार पन्नों की चार्जशीट और अन्य साक्ष्यों को आधार मानते हुए कोर्ट ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि यह हत्या एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा थी। इसी आधार पर पहले ट्रायल कोर्ट से बरी किए गए अमित जोगी को अब दोषी ठहराया गया है।

हालांकि फैसले के बाद अमित जोगी ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्हें पूरा पक्ष रखने का मौका नहीं दिया गया और उनके साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने इस निर्णय को अप्रत्याशित बताया और आगे कानूनी लड़ाई लड़ने के संकेत भी दिए हैं।

इस केस की कहानी भी उतनी ही जटिल रही है। 4 जून 2003 को हुए इस हत्याकांड में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें से 28 को दोषी करार दिया गया था, जबकि कुछ लोग सरकारी गवाह बन गए थे। साल 2007 में रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था, लेकिन बाद में यह मामला फिर से खुला।

Satish Jaggi ने अपने पिता की हत्या को राजनीतिक साजिश बताते हुए लगातार न्याय की लड़ाई जारी रखी। उनकी अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने इस केस को दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजा, जिसके बाद अब यह बड़ा फैसला सामने आया है।

इस मामले में एक और अहम नाम Vidyacharan Shukla का भी जुड़ा रहा, जिनके करीबी माने जाने वाले रामावतार जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते इस हत्याकांड को शुरू से ही साजिश के नजरिए से देखा जाता रहा है।

गौरतलब है कि इस केस में कई बड़े नाम सामने आए थे, जिनमें पुलिस अधिकारी से लेकर स्थानीय प्रभावशाली लोग भी शामिल थे। कई आरोपियों को उम्रकैद की सजा भी सुनाई जा चुकी है।

कुल मिलाकर, दो दशकों से ज्यादा समय बाद आए इस फैसले ने न सिर्फ एक पुराने केस को नया मोड़ दिया है, बल्कि छत्तीसगढ़ की राजनीति में भी एक बार फिर बहस और टकराव को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में यह मामला और भी बड़ा रूप ले सकता है।

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