हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने जबरदस्त उतार-चढ़ाव के बाद शानदार वापसी कर निवेशकों को राहत दी। शुरुआती कारोबार में भारी गिरावट के बावजूद BSE Sensex और Nifty 50 दोनों ही आखिरकार हरे निशान में बंद होने में कामयाब रहे।
दिन की शुरुआत काफी दबाव में रही, जहां सेंसेक्स करीब 1500 अंकों तक टूट गया और निफ्टी 22200 के करीब पहुंच गया। लेकिन दोपहर बाद बाजार ने जोरदार पलटवार किया। सेंसेक्स डे लो से करीब 1750 अंक उछलकर 185 अंकों की बढ़त के साथ 73,319 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 22,713 के स्तर पर पहुंच गया। यह रिकवरी इस बात का संकेत है कि बाजार में अभी भी खरीदारी की ताकत बनी हुई है।
इस उछाल के पीछे सबसे बड़ी वजह वैल्यू बायिंग रही। निवेशकों ने गिरावट को अवसर के रूप में देखा और सस्ते दामों पर खरीदारी की। आईटी सेक्टर ने बाजार को मजबूती दी, जहां HCL टेक्नोलॉजी और टेक महिंद्रा जैसे शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली। हालांकि, पेंट और ऑटो सेक्टर में दबाव बना रहा और कुछ प्रमुख शेयरों में गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक तनाव ने दिन की शुरुआत में बाजार को झटका दिया। Donald Trump के ईरान को लेकर सख्त बयान से निवेशकों में घबराहट बढ़ी, जिससे कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंच गईं। इसका असर सीधे बाजार की शुरुआती कमजोरी में देखने को मिला।
लेकिन दिन के दूसरे हिस्से में Reserve Bank of India के कदम ने बाजार की दिशा बदल दी। रुपये में सट्टेबाजी पर लगाम लगाने के लिए उठाए गए कदमों से भारतीय मुद्रा में करीब 2% की मजबूती आई और यह 92.83 प्रति डॉलर तक पहुंच गया। रुपये की इस मजबूती ने बाजार में भरोसा लौटाया और शॉर्ट कवरिंग को ट्रिगर किया, जिससे तेजी आई।
हालांकि, पूरे हफ्ते की तस्वीर अभी भी कमजोर बनी हुई है। 16 में से 12 सेक्टर गिरावट में रहे, जिसमें बैंकिंग और फार्मा सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। वहीं डिफेंस शेयरों में मजबूती देखने को मिली, जो इस अस्थिर माहौल में निवेशकों के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनते दिखे।
विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार की दिशा फिलहाल पूरी तरह ग्लोबल संकेतों पर निर्भर है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतें आने वाले दिनों में बाजार का रुख तय करेंगी। तकनीकी तौर पर निफ्टी के लिए 22000-22300 मजबूत सपोर्ट है, जबकि 23000-23200 के बीच रेजिस्टेंस बना हुआ है।
कुल मिलाकर, बाजार ने यह साफ कर दिया है कि गिरावट के बावजूद निवेशकों का भरोसा पूरी तरह टूटा नहीं है, लेकिन आगे की राह अभी भी सावधानी और समझदारी से तय करनी होगी।