सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र के जवाहरलाल नेहरू अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग द्वारा “सेव अ लाइफ” अभियान के अंतर्गत 01 अप्रैल 2026 को ओपीडी कॉम्प्लेक्स में हैंड्स-ओनली सीपीसीआर (कार्डियो-पल्मोनरी सेरेब्रल रीससिटेशन) प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम नागरिकों को हृदयाघात जैसी आपात स्थितियों में त्वरित एवं प्रभावी सहायता प्रदान करने के लिए सक्षम बनाना था।जिसमें विभिन्न आयु वर्ग के प्रतिभागियों 7 वर्ष के बच्चों से लेकर 80 वर्ष तक के वरिष्ठ नागरिकों ने भाग लिया।
इस अवसर पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग) डॉ. उदय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि हृदयाघात के शुरुआती कुछ मिनट अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं और ऐसे समय में प्रशिक्षित व्यक्ति ही जीवन एवं मृत्यु के बीच निर्णायक भूमिका निभा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि तत्काल सीपीआर प्रारंभ किया जाए, तो मरीज के जीवित बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
प्रशिक्षण सत्र का संचालन एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की विशेषज्ञ टीम डॉ. कुमुदनी एवं डॉ. जयिता सरकार द्वारा किया गया, जिन्होंने प्रतिभागियों को मैनक्विन के माध्यम से छाती पर सही गति एवं गहराई से दबाव देने का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। सत्र के दौरान आपात स्थिति की पहचान, त्वरित प्रतिक्रिया की प्रक्रिया तथा सामान्य भ्रांतियों को दूर करने पर भी विशेष ध्यान दिया गया।
यह कार्यक्रम चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं विभाग के मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ. विनीता द्विवेदी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. कौशलेंद्र ठाकुर एवं मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. उदय कुमार के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी इस पहल की सराहना किया तथा अपने-अपने संस्थानों एवं सामुदायिक स्थलों पर ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने हेतु अस्पताल प्रशासन से आग्रह किया, ताकि अधिक से अधिक लोगों को जीवन रक्षक तकनीकों से अवगत कराया जा सके।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम नागरिकों को “प्रथम प्रतिक्रिया प्रदाता” (फर्स्ट रेस्पोंडर) के रूप में तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ।