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अब ‘जितनी जरूरत उतना पैसा’—छत्तीसगढ़ में S-SNA मॉडल लागू, फंड के इस्तेमाल पर कड़ा नियंत्रण

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छत्तीसगढ़ सरकार ने वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है, जिससे अब सरकारी योजनाओं में फंड के उपयोग का तरीका पूरी तरह बदलने जा रहा है। राज्य के वित्त विभाग ने स्टेट सिंगल नोडल एजेंसी (S-SNA) मॉडल लागू करने का आदेश जारी कर दिया है, जिसका उद्देश्य सरकारी धन के सही और जरूरत आधारित उपयोग को सुनिश्चित करना है।

इस नई व्यवस्था के तहत अब योजनाओं के लिए पैसा एक साथ जारी नहीं किया जाएगा, बल्कि जरूरत के हिसाब से किस्तों में दिया जाएगा। यानी अब “पहले पैसा निकालो, बाद में खर्च करो” वाली व्यवस्था खत्म होगी और “जितनी जरूरत, उतनी राशि” का सिद्धांत लागू किया जाएगा। इससे अनावश्यक रूप से बैंक खातों में पड़े सरकारी पैसे पर लगाम लगेगी।

सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि ई-कोष से जारी राशि केवल वास्तविक उपयोग के आधार पर ही दी जाएगी और उसे किसी भी हालत में फिक्स डिपॉजिट, फ्लेक्सी या अन्य ब्याज कमाने वाले साधनों में जमा नहीं किया जा सकेगा। S-SNA के तहत बनाए जाने वाले खाते भी सामान्य बचत खाते होंगे, जिनका इस्तेमाल सिर्फ भुगतान के लिए किया जाएगा।

वित्त विभाग ने इस आदेश की जानकारी सभी विभागों, संभागीय आयुक्तों, कलेक्टरों और विभागाध्यक्षों को दे दी है। खास तौर पर राज्य के 12 विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे 30 अप्रैल 2026 तक इस मॉडल को पूरी तरह लागू करें।

इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह यह रही है कि अब तक कई योजनाओं में कोषालय से अग्रिम राशि निकालकर बैंक खातों में जमा कर दी जाती थी, जो लंबे समय तक बिना उपयोग के पड़ी रहती थी। इससे न सिर्फ वित्तीय अनुशासन प्रभावित होता था, बल्कि सरकारी धन का सही उपयोग भी नहीं हो पाता था।

वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि नियमों के अनुसार बिना तत्काल जरूरत के कोषालय से राशि निकालना गंभीर अनियमितता है। अब इस पर सख्ती से अमल किया जाएगा। मुख्य सचिव के निर्देश पर केंद्र सरकार की तरह ही “जस्ट इन टाइम” प्रणाली और मदर-चाइल्ड अकाउंट व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे फंड का फ्लो पारदर्शी और प्रभावी बने।

एक और अहम बात यह है कि लंबे समय तक बैंक खातों में पड़ी सरकारी राशि निष्क्रिय हो जाती है या फिर भारतीय रिजर्व बैंक के डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड (DEA Fund) में चली जाती है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए भी यह नई व्यवस्था लागू की जा रही है।

कुल मिलाकर, S-SNA मॉडल के जरिए सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि हर योजना में पैसा सही समय पर, सही जगह और सही उद्देश्य के लिए खर्च हो। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन में भी तेजी आएगी।

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