Meta Pixel

नगरी में सामुदायिक भवन पर रोक से सियासी भूचाल, भाजपा कार्यकर्ताओं ने दी सामूहिक इस्तीफे और आंदोलन की चेतावनी

Spread the love

धमतरी जिले के नगरी नगर पंचायत में भाजपा के स्थापना दिवस के दिन ही ऐसा घटनाक्रम सामने आया जिसने स्थानीय राजनीति का तापमान अचानक बढ़ा दिया। वार्ड क्रमांक 09 और 10 में वर्षों से प्रतीक्षित सामुदायिक भवन निर्माण पर अचानक रोक लगाए जाने के फैसले ने भाजपा कार्यकर्ताओं और वार्डवासियों के भीतर गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पार्टी के ही कई कार्यकर्ताओं ने अपनी प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से सामूहिक इस्तीफा देने की चेतावनी तक दे डाली। यह मामला अब केवल एक निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि संगठन के भीतर उभरते असंतोष और स्थानीय प्रशासनिक निर्णयों पर सवाल खड़े करने वाला बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

अंजनी चौक के पास प्रस्तावित इस सामुदायिक भवन की मांग लंबे समय से की जा रही थी। शासन से स्वीकृति मिलने के बाद भूमि पूजन भी संपन्न हो चुका था और लोगों को उम्मीद थी कि जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। लेकिन अचानक नगर पंचायत के एक अधिकारी द्वारा फोन पर निर्माण कार्य रोकने के निर्देश जारी किए जाने से पूरे इलाके में नाराजगी फैल गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भूमि पूजन के समय किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई, तो अब अचानक इस तरह काम रोकना सीधे तौर पर दबाव की राजनीति की ओर इशारा करता है।

विवाद की एक बड़ी वजह उस स्थान पर मौजूद वन विभाग का जर्जर शासकीय भवन भी बन गया है, जिसे पूर्व विधायक पिंकी शिवराजशाह के नाम से आबंटित बताया जा रहा है। वार्डवासियों का आरोप है कि पूर्व विधायक पिछले तीन वर्षों से वहां निवास नहीं कर रहीं और भवन सिर्फ नाम मात्र के लिए खड़ा है, जहां केवल सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। उनका कहना है कि जर्जर हो चुके इस ढांचे को हटाकर सामुदायिक भवन का निर्माण किया जाना चाहिए था, लेकिन इसे बहाना बनाकर काम रोक दिया गया है।

हालांकि इस पूरे मामले में पूर्व विधायक पिंकी शिवराजशाह ने अपना पक्ष रखते हुए स्पष्ट किया कि उन्होंने निर्माण कार्य का कोई विरोध नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि भले ही भवन उनके नाम से आबंटित है, लेकिन वे वहां निवास नहीं करतीं और केवल सुरक्षा व्यवस्था बनी हुई है। उन्होंने निर्माण कार्य में किसी भी तरह की बाधा का समर्थन करने से साफ इनकार किया।

इस घटनाक्रम से भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं और पार्षदों में असंतोष खुलकर सामने आ गया है। उनका कहना है कि नगरी क्षेत्र लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा है, लेकिन इस तरह के फैसलों से संगठन की छवि और जनाधार दोनों को नुकसान पहुंच सकता है। कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि अधिकारियों पर राजनीतिक दबाव डालकर विकास कार्यों को रोका जा रहा है, जिससे पार्टी के भीतर ही असंतोष बढ़ता जा रहा है। हालांकि भाजपा नगरी मंडल प्रभारी रविशंकर दुबे ने इस्तीफे की खबरों को निराधार बताते हुए भरोसा दिलाया कि वार्डवासियों की समस्याओं का समाधान जल्द किया जाएगा।

प्रशासन की ओर से मुख्य नगर पालिका अधिकारी ने सफाई देते हुए कहा कि निर्माण स्थल को लेकर एक मौखिक शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके चलते एहतियातन जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य को रोका गया है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी और यदि कोई बाधा नहीं पाई जाती है तो निर्माण कार्य फिर से शुरू कर दिया जाएगा।

इधर, वार्डवासियों और पार्षदों ने प्रशासन को साफ चेतावनी दी है कि यदि अगले 10 दिनों के भीतर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे चक्का जाम और उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसी किसी भी स्थिति की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

भाजपा के स्थापना दिवस जैसे महत्वपूर्ण मौके पर उपजा यह विवाद न केवल स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर रहा है, बल्कि यह संकेत भी दे रहा है कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी किस तरह संगठन के लिए चुनौती बन सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन और पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को किस तरह संभालते हैं, क्योंकि फिलहाल नगरी की सियासत में यह मुद्दा केंद्र में आ चुका है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *