हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार ने ऐसी शुरुआत की जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। सुबह के शुरुआती सत्र में ही बाजार भारी दबाव में नजर आया और सेंसेक्स 700 अंकों से ज्यादा की गिरावट के साथ लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 22,800 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव साफ दिखा, जिससे बाजार का माहौल नकारात्मक हो गया और निवेशकों में घबराहट का माहौल बनने लगा।
दिनभर के कारोबार में कई दिग्गज शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। खासतौर पर एविएशन और अन्य सेक्टर के कुछ प्रमुख स्टॉक्स में गिरावट ने बाजार की कमजोरी को और बढ़ा दिया। इटरनल और इंडिगो जैसे शेयरों में करीब 2 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों का भरोसा और कमजोर किया। बड़े शेयरों में बिकवाली का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया, जिससे सेंटीमेंट लगातार कमजोर बना रहा।
इसी बीच विदेशी मुद्रा बाजार से भी अच्छी खबर नहीं आई। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 17 पैसे टूटकर 93.07 के स्तर तक पहुंच गया। रुपये की यह गिरावट इस बात का संकेत मानी जा रही है कि विदेशी निवेशकों का भरोसा फिलहाल कमजोर पड़ रहा है और पूंजी का बाहर जाना जारी है। डॉलर की मजबूती ने भी भारतीय बाजारों पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण एक साथ काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले कमजोर संकेत, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और डॉलर इंडेक्स की मजबूती ने भारतीय शेयर बाजार की रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। इसके अलावा निवेशकों की सतर्कता और मुनाफावसूली ने भी बाजार को नीचे खींचने में अहम भूमिका निभाई है।
विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की चाल और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर निर्भर करेगी। फिलहाल बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं, जिससे निवेशकों को सतर्क रहकर रणनीति बनाने की जरूरत है।
इस गिरावट ने साफ कर दिया है कि बाजार में अनिश्चितता का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है और थोड़ी सी भी नकारात्मक खबर बड़े झटके का कारण बन सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए संयम और समझदारी ही सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है।