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शिक्षा से तय हो रही मातृत्व की दिशा : कम पढ़ी महिलाओं के ज्यादा बच्चे, शिक्षित के हैं कम

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा और जनसंख्या नियंत्रण के बीच गहरा संबंध निकलकर सामने आया है। हाल ही में जारी ‘जन्म सांख्यिकी’ के आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जैसे-जैसे महिलाओं में शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है, परिवार नियोजन के प्रति उनकी जागरूकता भी उतनी ही प्रभावी हो रही है।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि, स्नातक और उससे अधिक शिक्षित महिलाओं की तुलना में कम शिक्षित या सिर्फ मैट्रिक तक पढ़ी महिलाओं की जन्म दर कई गुना अधिक है। चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि अभी भी 15 या उससे कम आयु की किशोरियों ने भी बच्चों को जन्म दिया है, जबकि यह पूरी तरह गैर कानूनी है।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है
राज्य के ताजा आंकड़ों के अनुसार, जन्म लेने वाले बच्चों को मां की उम्र और शिक्षा के स्तर के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। इसमें साफ दिखता है कि 20 से 29वर्ष की आयु वर्ग की माताओं में जन्म दर सबसे अधिक है, लेकिन इसी वर्ग में निरक्षर और केवल प्राथमिक स्तर तक शिक्षित महिलाओं की संख्या भी बड़ी है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। यहां निरक्षर और ‘बिलो प्राइमरी श्रेणी की महिलाओं के यहां जन्म लेने वाले बच्चों का अनुपात काफी अधिक है। वहीं ग्रेजुएट और उससे ऊपर’ शिक्षित महिलाओं के यहां जन्म की संख्या अपेक्षाकृत कम है। इसका सीधा संकेत है कि उच्च शिक्षा तक पहुंच अभी भी सीमित है।

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच जन्म अंतर
ग्रामीण क्षेत्र में कुल 3 लाख 9 हजार 684 जन्म दर्ज किए गए। ग्रामीण इलाकों में निरक्षर महिलाओं द्वारा दिए गए जन्मों की संख्या शहरी इलाकों की तुलना में लगभग चार गुना ज्यादा है। इसी तरह शहरों में कुल 2,83,513 जन्म हुए। यहां मैट्रिक और उससे ऊपर शिक्षित महिलाओं का अनुपात बेहतर है।

20 से 29 वर्ष में सर्वाधिक जन्म
डेटा से पता चलता है कि राज्य में सबसे अधिक जन्म 20 से 24 वर्ष (2,38,912) और 25 से 29 वर्ष (2,08,435) की आयु की महिलाओं के बीच हुए हैं। 35 वर्ष की आयु के बाद जन्म दर में तेजी से गिरावट देखी गई है, जो यह दर्शाता है कि अधिकांश परिवार 30 साल की उम्र तक अपनी संतान संबंधी योजनाएं पूरी कर लेते हैं।

शिक्षा का स्तर और जन्म दरः एक तुलना
आंकड़ों के अनुसार, राज्य में कुल 5 लाख 93 हजार 197 बच्चों का जन्म हुआ। इसमें शिक्षा के स्तर पर भारी अंतर देखा गया। मसलन, दसवीं तक शिक्षित महिलाओं, जो स्नातक नहीं थी, उन्होंने 3 लाख 52 हजार 657 बच्चों को जन्म दिया। जबकि स्नातक या उससे अधिक शिक्षित महिलाओं के केवल 50 हजार 824 बच्चे ही हुए। यह डेटा साबित करता है कि उत्च्च्च शिक्षा महिलाओं को करियर के प्रति जागरूक कर रही है।

कम उम्र में मां बनने का खतरनाक डाटा
रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू ‘बाल मातृत्व है। आंकड़ों के मुताबिक, 15 साल से कम उम्र की किशोरियों ने 118 बच्चों को जन्म दिया। वहीं, 15-19 आयु वर्ग में यह संख्या 15 हजार 333 रही। इनमें से अधिकांश मामले ग्रामीण क्षेत्रों से जुड़े हैं, जो कम उम्र में शादी या बाल विवाह और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की कमी की ओर इशारा करते हैं।

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