हफ्ते की शुरुआत भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद झटकेदार रही। BSE Sensex और Nifty 50 दोनों प्रमुख सूचकांकों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों के बीच घबराहट का माहौल बन गया। सोमवार सुबह बाजार खुलते ही तेज बिकवाली देखने को मिली और कुछ ही समय में सेंसेक्स करीब 1600 अंकों तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी 23,600 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। यह गिरावट साफ संकेत दे रही है कि बाजार फिलहाल अनिश्चितता और दबाव के दौर से गुजर रहा है।
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल माना जा रहा है। Brent Crude 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है, जिसने महंगाई और लागत बढ़ने की आशंकाओं को और गहरा कर दिया है। इसके साथ ही United States और Iran के बीच बढ़ते तनाव ने बाजार की चिंता को और बढ़ा दिया है। खासकर Strait of Hormuz जैसे अहम क्षेत्र में संभावित बाधा का खतरा वैश्विक सप्लाई पर असर डाल सकता है, जिसका सीधा प्रभाव भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर पड़ता है।
बाजार की इस गिरावट का असर लगभग हर सेक्टर में देखने को मिला। बैंकिंग सेक्टर पर दबाव सबसे ज्यादा रहा, जहां BSE BANKEX करीब 2.5% तक गिर गया। इसके अलावा SENSEX 50 और Next 50 जैसे इंडेक्स भी 2% से अधिक नीचे फिसल गए, जिससे यह साफ हो गया कि कमजोरी सिर्फ कुछ शेयरों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे बाजार में फैली हुई है। बड़े शेयरों के साथ-साथ मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट भी दबाव में नजर आए।
हालांकि इस गिरावट के बीच कुछ शेयरों ने मजबूती भी दिखाई। EIEL में करीब 12% की तेजी दर्ज की गई, जबकि ZYDUS WELL, ACME SOLAR, SPICEJET और STL Tech जैसे शेयरों में भी सीमित बढ़त देखने को मिली। लेकिन इनकी तेजी बाजार की कुल गिरावट के सामने टिक नहीं पाई, जिससे यह संकेत मिलता है कि फिलहाल बाजार में चुनिंदा मौके ही मौजूद हैं।
दूसरी ओर बिकवाली का दबाव काफी भारी रहा। JYOTI CNC में सबसे ज्यादा गिरावट देखने को मिली, जो 14% से अधिक टूट गया। EASYMYTRIP, INTELLECT और COHANCE जैसे शेयर भी 4 से 5 प्रतिशत तक गिर गए। IIFL Capital में भी कमजोरी ने वित्तीय सेक्टर की चिंता को बढ़ा दिया। यह साफ दर्शाता है कि निवेशक इस समय जोखिम से बचने के लिए तेजी से मुनाफावसूली कर रहे हैं।
मार्केट ब्रेड्थ भी पूरी तरह नकारात्मक नजर आई। कुल 3588 शेयरों में से केवल 727 में बढ़त रही, जबकि 2714 शेयर गिरावट में कारोबार करते दिखे। 147 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ। शुरुआती कारोबार में 123 शेयर अपर सर्किट में पहुंचे, जबकि 78 शेयर लोअर सर्किट में चले गए। इसके साथ ही बाजार का कुल मार्केट कैप भी घटकर करीब 451.62 लाख करोड़ रुपये (लगभग 4.87 ट्रिलियन डॉलर) रह गया, जो निवेशकों के लिए चिंता का संकेत है।
ऐसे माहौल में बाजार विशेषज्ञों की राय साफ है कि निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए। वैश्विक संकेत, खासकर तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक हालात, आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करेंगे। गिरावट के इस दौर में मजबूत और क्वालिटी शेयरों में धीरे-धीरे निवेश करना समझदारी भरा कदम हो सकता है, साथ ही जोखिम प्रबंधन और स्टॉप लॉस का पालन बेहद जरूरी है।
कुल मिलाकर, भारतीय शेयर बाजार इस समय बाहरी दबावों से जूझ रहा है और जब तक वैश्विक हालात स्थिर नहीं होते, तब तक उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना बनी हुई है।