13 अप्रैल का दिन भारतीय शेयर बाजार के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहा। सुबह भारी गिरावट के साथ शुरुआत करने वाले BSE Sensex और Nifty 50 ने दिन के दौरान जोरदार रिकवरी दिखाई, लेकिन अंततः बाजार गिरावट के साथ ही बंद हुआ। इस पूरे सत्र ने निवेशकों को साफ संकेत दिया कि बाजार अभी भी अनिश्चितता और दबाव के दौर से गुजर रहा है।
शुरुआती कारोबार में भारी बिकवाली के चलते सेंसेक्स अपने निचले स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन इसके बाद निचले स्तरों पर खरीदारी यानी वैल्यू बायिंग ने बाजार को संभाल लिया। सेंसेक्स अपने इंट्राडे लो से करीब 1100 अंक तक उछल गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 1.5% की रिकवरी देखने को मिली। बैंकिंग सेक्टर में भी सुधार दिखा और बैंक निफ्टी करीब 2.5% तक उछल गया।
हालांकि यह तेजी ज्यादा देर टिक नहीं पाई। दोपहर बाद बाजार में फिर से दबाव बढ़ा और दिन के अंत में सेंसेक्स 702 अंकों की गिरावट के साथ 76,847 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 207 अंकों की कमजोरी के साथ 23,842 पर आ गया।
इस उतार-चढ़ाव के बीच कुछ सेक्टर्स में हल्की मजबूती भी देखने को मिली। रियल्टी और मेटल सेक्टर में करीब 1% तक की रिकवरी आई, जबकि आईसीआईसीआई बैंक जैसे कुछ बड़े शेयरों में 2% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई। इसके विपरीत एचडीएफसी बैंक दबाव में रहा, जिससे बैंकिंग सेक्टर की मजबूती सीमित रही।
ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर देखने को मिला, जहां करीब 2% की गिरावट आई। Maruti Suzuki, Eicher Motors और Hero MotoCorp जैसे शेयरों में 5% तक की गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। इसके अलावा तेल कंपनियों—BPCL, HPCL और इंडियन ऑयल—में भी 2 से 4 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई, जिसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें रहीं।
ब्रॉडर मार्केट की बात करें तो मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और इनमें गिरावट 1% से कम रही। यह संकेत देता है कि बाजार में पूरी तरह कमजोरी नहीं है, बल्कि चुनिंदा सेक्टरों में अभी भी मजबूती बनी हुई है।
संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए अहम रहीं। विदेशी निवेशकों ने हाल ही में करीब 672 करोड़ रुपये की खरीदारी की, जबकि घरेलू निवेशकों ने भी 410 करोड़ रुपये का निवेश किया। इसके साथ ही म्यूचुअल फंड और SIP का मजबूत फ्लो बाजार को सहारा देता नजर आ रहा है।
तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी के लिए 23,500 का स्तर फिलहाल मजबूत सपोर्ट बना हुआ है। अगर यह स्तर टूटता है, तो बाजार में और गिरावट देखने को मिल सकती है। वहीं 23,990 के आसपास रेजिस्टेंस बना हुआ है, जहां से बार-बार बिकवाली बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर, बाजार में फिलहाल अस्थिरता का माहौल बना हुआ है। निचले स्तरों पर खरीदारी जरूर हो रही है, लेकिन वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों के दबाव के चलते निवेशकों को अभी भी सतर्क रहने की जरूरत है।