सेल- भिलाई इस्पात संयंत्र के सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग द्वारा विगत दिनों में सुरक्षित कार्यसंस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में विद्युत सुरक्षा विषय पर अर्धदिवसीय “लार्ज ग्रुप इंटरैक्शन” कार्यक्रम का आयोजन मानव संसाधन विकास केन्द्र में किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं विभाग) श्री डी. सतपथी उपस्थित रहे। यह कार्यक्रम महाप्रबंधक प्रभारी (सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग) श्री एस. के. अग्रवाल के मार्गदर्शन में असेंबली हॉल में आयोजित हुआ।
इस कार्यक्रम में संयंत्र के विभिन्न विभागों से कुल 56 विद्युत कार्यपालकों ने भाग लिया, जिससे विद्युत सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर संरचित संवाद एवं ज्ञान-विनिमय का एक प्रभावी मंच उपलब्ध हुआ।
अपने संबोधन में श्री डी. सतपथी ने कहा कि कार्यस्थल पर दुर्घटनाओं को न्यूनतम करने का सबसे प्रभावी उपाय प्रत्येक स्तर पर सुरक्षित विद्युत कार्यप्रणालियों का सतत अनुपालन है। उन्होंने सभी विद्युत कार्यपालकों से आह्वान किया कि सुरक्षा मानकों को केवल औपचारिक प्रक्रिया न मानते हुए इसे अपनी पेशेवर जिम्मेदारी के रूप में अपनाएं, जो मानव जीवन एवं उत्पादन दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
कार्यक्रम का तकनीकी सत्र महाप्रबंधक (विद्युत, एसएमएस–3) श्री पी. सतपथी द्वारा संचालित किया गया, जिन्होंने अपने व्यापक अनुभव के आधार पर विषय को व्यवहारिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का समन्वयन सहायक महाप्रबंधक (सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग) श्री अजय टल्लू द्वारा किया गया।
सत्र के दौरान औद्योगिक वातावरण में विद्युत सुरक्षा से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। प्रारंभ में सुरक्षा मानकों की अवधारणा, उनके उद्देश्य एवं सुरक्षित कार्यप्रणाली स्थापित करने में उनकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया। इसके पश्चात प्रतिभागियों को विद्युत सुरक्षा मानकों के मूल उद्देश्य— दुर्घटनाओं की रोकथाम एवं सुरक्षित कार्य सुनिश्चित करने से अवगत कराया गया।
कार्यक्रम में अर्थिंग एवं ग्राउंडिंग की भूमिका को विद्युत दुर्घटनाओं से बचाव के प्रमुख साधन के रूप में विस्तार से समझाया गया। साथ ही, संयंत्र में सामान्यतः उत्पन्न होने वाले विद्युत जोखिमों, जैसे त्रुटिपूर्ण वायरिंग, खुले विद्युत अवयव एवं ओवर-करंट स्थितियों की पहचान एवं उनके संभावित खतरों पर भी चर्चा की गई। विशेष रूप से मानव शरीर पर विद्युत धारा के प्रभावों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाते हुए सुरक्षा प्रोटोकॉल के पालन की अनिवार्यता को रेखांकित किया गया।
यह कार्यक्रम भिलाई इस्पात संयंत्र की सुरक्षा प्रबंधन के प्रति सक्रिय एवं प्रतिबद्ध दृष्टिकोण का परिचायक है, जिसमें समय-समय पर इस प्रकार के ज्ञान-विनिमय कार्यक्रमों के माध्यम से कार्यबल को जागरूक, सतर्क एवं सक्षम बनाया जाता है। सेफ्टी इंजीनियरिंग विभाग द्वारा ऐसे प्रयासों के माध्यम से कार्यस्थल पर शून्य दुर्घटना संस्कृति को सुदृढ़ करने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है।