छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं के कारोबार का एक बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और दवा सप्लाई सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एंटीबायोटिक के नाम पर नकली दवा बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए भाटापारा और सारंगढ़ के दो दवा कारोबारियों समेत कुल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। इस पूरे मामले की कड़ी इंदौर तक जुड़ी मिली है, जहां से इस फर्जी दवा की सप्लाई की जा रही थी।
यह मामला दिसंबर में गोगांव स्थित एक ट्रांसपोर्ट कंपनी में संदिग्ध दवाओं की खेप मिलने से सामने आया था। चार महीने तक चली जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि एंटीबायोटिक के नाम पर जो दवा सप्लाई की जा रही थी, वह असल में सिर्फ एक साधारण पाउडर थी। पैकेजिंग पर चेन्नई की एक फर्जी कंपनी का नाम दर्ज था, जिसकी वास्तविकता में कोई मौजूदगी ही नहीं है।
जांच के दौरान खाद्य एवं औषधि प्रशासन की टीम ने ट्रांसपोर्ट से मिले दस्तावेजों के आधार पर सारंगढ़ के एक मेडिकल स्टोर संचालक से पूछताछ की। उसके मोबाइल में नकली दवा की तस्वीर मिलने के बाद पूरी साजिश का खुलासा होने लगा। पूछताछ में सामने आया कि यह दवा भाटापारा के एक एजेंसी संचालक के जरिए इंदौर से मंगाई गई थी।
इसके बाद जांच टीम इंदौर पहुंची और वहां के होलसेलर तक पहुंचकर पूरे नेटवर्क को ट्रेस किया गया। दवा के ऑर्डर, पेमेंट और सप्लाई से जुड़े सभी सबूत इकट्ठा किए गए। पुलिस की मदद से जांच को मजबूत किया गया और आखिरकार तीनों आरोपियों को ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट के तहत गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
यह छत्तीसगढ़ में नकली दवाओं के कारोबार से जुड़ा तीसरा बड़ा मामला है। इससे पहले गरियाबंद में नकली कफ सिरप और रायगढ़ में नकली क्रीम के मामलों में भी कार्रवाई हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश में नकली दवाओं का नेटवर्क गहराई तक फैला हुआ है।
इस केस में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया, जब जांच से जुड़े एक अधिकारी को संदिग्ध परिस्थितियों में आरोपी के साथ बैठक करते हुए पकड़ा गया, जिसके बाद उसे निलंबित कर दिया गया। बावजूद इसके, जांच टीम ने दबाव और चुनौतियों के बीच पूरी पड़ताल कर आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की।
यह मामला न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि आम लोगों की सेहत के लिए भी गंभीर खतरे की चेतावनी है। नकली दवाएं सीधे लोगों की जान के साथ खिलवाड़ करती हैं, इसलिए ऐसे नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई और निगरानी बेहद जरूरी हो गई है।