देश में कीमती धातुओं के दामों ने एक बार फिर तेजी पकड़ ली है। 15 अप्रैल को सोने और चांदी की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला है। India Bullion and Jewellers Association के मुताबिक, 24 कैरेट सोना 2,938 रुपये की बढ़त के साथ 10 ग्राम पर 1.53 लाख रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। वहीं चांदी भी पीछे नहीं रही और 13,874 रुपये महंगी होकर 2.51 लाख रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई।
कुछ ही दिनों पहले सोना 1.50 लाख रुपये और चांदी 2.37 लाख रुपये के आसपास थी, लेकिन अचानक आई इस तेजी ने बाजार का मूड पूरी तरह बदल दिया है। निवेशकों के लिए यह एक बड़ा संकेत माना जा रहा है कि सुरक्षित निवेश की ओर रुझान फिर बढ़ रहा है।
अगर पूरे साल की बात करें तो सोना अब तक करीब 19,754 रुपये महंगा हो चुका है। साल की शुरुआत में इसकी कीमत 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम थी, जो अब 1.53 लाख तक पहुंच गई है। इसी तरह चांदी भी 20,435 रुपये की बढ़त के साथ 2.30 लाख से बढ़कर 2.51 लाख रुपये प्रति किलो हो गई है।
हालांकि इस दौरान बाजार में भारी उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला। जनवरी में सोना 1.76 लाख और चांदी 3.86 लाख रुपये के ऑलटाइम हाई तक पहुंच गई थी, लेकिन बाद में वैश्विक तनाव—खासकर अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव—के कारण कीमतों में गिरावट भी आई।
कीमतों में अंतर की बात करें तो देश के अलग-अलग शहरों में सोने के रेट अलग-अलग होते हैं। इसके पीछे ट्रांसपोर्ट और सिक्योरिटी लागत, स्थानीय मांग, ज्वेलरी एसोसिएशन की भूमिका और ज्वेलर्स के पुराने स्टॉक जैसे कारण जिम्मेदार होते हैं।
सरकार के हालिया फैसलों का भी बाजार पर असर दिख रहा है। अब सोने-चांदी और प्लेटिनम के गहनों को विदेश से मंगाने के लिए विशेष लाइसेंस लेना होगा। Directorate General of Foreign Trade के इस फैसले के बाद सप्लाई पर असर पड़ा है, जिससे कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
अगर आप सोना खरीदने की सोच रहे हैं, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। हमेशा BIS हॉलमार्क वाला सर्टिफाइड सोना ही खरीदें और खरीदने से पहले उसकी कीमत अलग-अलग स्रोतों से जरूर जांच लें।
वहीं चांदी की शुद्धता जांचने के लिए कुछ आसान तरीके भी अपनाए जा सकते हैं—जैसे मैग्नेट टेस्ट, आइस टेस्ट, स्मेल टेस्ट और कपड़े से रगड़कर पहचान करना।
कुल मिलाकर, सोना-चांदी में आई यह तेजी निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए अहम संकेत है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा काफी हद तक वैश्विक हालात और सरकारी नीतियों पर निर्भर करेगी।