आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी Wipro ने वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही के नतीजे जारी कर दिए हैं, जिनमें तस्वीर मिली-जुली नजर आई। कंपनी का मुनाफा जरूर बढ़ा है, लेकिन रेवेन्यू उम्मीद से कम रहने के कारण बाजार में सतर्कता का संकेत मिला है।
चौथी तिमाही में कंपनी का शुद्ध लाभ करीब 12% बढ़कर 3502 करोड़ रुपये हो गया। यह बढ़त निवेशकों के लिए राहत भरी है, लेकिन दूसरी तरफ रेवेन्यू ने निराश किया। कंपनी की कमाई 2.4 बिलियन डॉलर रही, जबकि बाजार को 2.6 बिलियन डॉलर की उम्मीद थी। यानी ग्रोथ दिखी, लेकिन उम्मीदों जितनी नहीं।
आईटी सर्विसेज से मिलने वाली आय 2.65 बिलियन डॉलर रही, जिसमें मामूली बढ़त देखने को मिली। हालांकि कॉन्स्टेंट करेंसी ग्रोथ लगभग स्थिर रही, जिससे साफ है कि कंपनी की असली ग्रोथ अभी धीमी गति से आगे बढ़ रही है।
मार्जिन के मोर्चे पर भी दबाव दिखा। आईटी सर्विसेज का ऑपरेटिंग मार्जिन 17.3% रहा, जो पिछली तिमाही से थोड़ा कम है। इसका मतलब है कि कंपनी को लागत बढ़ने और मांग कमजोर रहने दोनों का असर झेलना पड़ रहा है।
हालांकि, एक सकारात्मक संकेत डील बुकिंग से मिला है। कुल बुकिंग 3.46 बिलियन डॉलर रही, जबकि बड़े सौदों की बुकिंग में 65% की जबरदस्त बढ़त दर्ज हुई। इससे यह उम्मीद बनती है कि आने वाले समय में कंपनी की कमाई में सुधार हो सकता है, लेकिन फिलहाल इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा।
आगे की राह को लेकर कंपनी ने ज्यादा उत्साहजनक संकेत नहीं दिए हैं। जून तिमाही के लिए कंपनी ने -2% से 0% तक की ग्रोथ का अनुमान जताया है, जो मांग में अनिश्चितता को दर्शाता है।
इसी बीच कंपनी ने निवेशकों को खुश करने के लिए 15,000 करोड़ रुपये के शेयर बायबैक का ऐलान किया है। बायबैक की कीमत 250 रुपये प्रति शेयर तय की गई है, हालांकि इसे लागू करने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी।
कंपनी के CEO श्रीणि पालिया ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तेजी से बिजनेस मॉडल बदल रहा है और कंपनी अब AI-आधारित सेवाओं पर फोकस बढ़ा रही है। वहीं CFO अर्पणा अय्यर के अनुसार, कंपनी की कैश फ्लो स्थिति मजबूत बनी हुई है।
कुल मिलाकर, विप्रो के नतीजे यह संकेत देते हैं कि कंपनी मुनाफे के मामले में मजबूत है, लेकिन रेवेन्यू और डिमांड के मोर्चे पर अभी चुनौतियां बरकरार हैं।