Lenskart एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। सोशल मीडिया पर कंपनी की एक कथित ‘ग्रूमिंग गाइडलाइन’ वायरल होने के बाद बहस छिड़ गई है, जिसमें कर्मचारियों के ड्रेस कोड को लेकर धार्मिक प्रतीकों पर अलग-अलग नियम बताए गए हैं।
इस वायरल डॉक्यूमेंट में दावा किया गया कि कर्मचारियों को बिंदी, तिलक और कलावा पहनने से रोका गया है, जबकि हिजाब और पगड़ी को कुछ शर्तों के साथ अनुमति दी गई है। जैसे ही यह स्क्रीनशॉट सामने आया, सोशल मीडिया पर लोगों ने कंपनी की नीतियों पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब एक्टिविस्ट शेफाली वैद्य ने इसे लेकर कंपनी के फाउंडर पीयूष बंसल से सवाल किया कि अगर हिजाब की अनुमति है, तो बिंदी और कलावा पर रोक क्यों है। इसके बाद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बहस तेज हो गई और कई यूजर्स ने कंपनी को ट्रोल करना शुरू कर दिया।
हालांकि, विवाद बढ़ता देख पीयूष बंसल ने खुद सामने आकर सफाई दी। उन्होंने कहा कि जो डॉक्यूमेंट वायरल हो रहा है, वह पुराना है और कंपनी की वर्तमान नीति को नहीं दर्शाता। उनके मुताबिक, लेंसकार्ट सभी धर्मों और सांस्कृतिक मान्यताओं का सम्मान करता है, और कंपनी में काम करने वाले कर्मचारी अपने विश्वास के प्रतीकों को गर्व के साथ धारण करते हैं।
वायरल गाइडलाइन में यह भी लिखा गया था कि हिजाब या पगड़ी पहनने वाले कर्मचारियों को काले रंग का ही उपयोग करना होगा और यह कंपनी के लोगो को ढकना नहीं चाहिए। वहीं बुर्का पहनकर स्टोर में काम करने की अनुमति नहीं बताई गई थी। इन शर्तों को लेकर भी लोगों ने सवाल उठाए।
दिलचस्प बात यह है कि यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब कंपनी का बिजनेस प्रदर्शन मजबूत बना हुआ है। हालिया दिसंबर तिमाही में लेंसकार्ट का मुनाफा तेजी से बढ़कर 131 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में कई गुना ज्यादा है।
कुल मिलाकर, यह मामला कॉर्पोरेट नीतियों, धार्मिक स्वतंत्रता और कार्यस्थल के ड्रेस कोड के बीच संतुलन को लेकर एक बड़ी बहस बन गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि कंपनी आगे अपनी पॉलिसी को लेकर और स्पष्टता देती है या नहीं।