रायपुर में पेंशनरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच लंबित करीब साढ़े 10 हजार करोड़ रुपए की वसूली राशि को लेकर भारतीय राज्य पेंशनर्स महासंघ ने साफ कहा है कि यह रकम पेंशनरों के अधिकार की है और इसका उपयोग प्राथमिकता से उनके हित में किया जाना चाहिए।
महासंघ का कहना है कि पिछले 88 महीनों से महंगाई राहत (DR) का एरियर लंबित है, जिससे पेंशनरों की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश से वसूली की जा रही राशि का इस्तेमाल सीधे पेंशनरों के बकाया भुगतान में किया जाना चाहिए, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
संघ के प्रांताध्यक्ष वीरेन्द्र नामदेव और प्रदेश महामंत्री प्रवीण कुमार त्रिवेदी ने मांग रखी है कि वसूली में प्राप्त करीब 2000 करोड़ रुपए की राशि को तुरंत अंतरिम राहत के रूप में जारी किया जाए और DR एरियर का भुगतान शुरू किया जाए। उनका कहना है कि बढ़ती महंगाई के इस दौर में वरिष्ठ नागरिकों के लिए यह राशि बेहद जरूरी है।
महासंघ ने यह भी तर्क दिया कि यदि इस बड़ी राशि का सही उपयोग किया जाता है, तो लाखों पेंशनरों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आर्थिक परेशानियां काफी हद तक कम हो सकती हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से अपील की है कि वसूली प्रक्रिया को तेज किया जाए और प्राप्त राशि को प्राथमिकता से पेंशनरों के बकाया भुगतान में लगाया जाए।
इसके साथ ही संगठन ने पूरे मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी वित्तीय गड़बड़ी के बावजूद अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना चिंताजनक है। केवल बैंक पर जिम्मेदारी डालना मामले से ध्यान हटाने जैसा है। इसलिए इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
पेंशनर्स महासंघ का कहना है कि वे 2018-19 से लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया। ऐसे में अब उनकी मांग और तेज हो गई है और सरकार से जल्द फैसला लेने की उम्मीद जताई जा रही है।