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रूसी तेल पर ट्रंप प्रशासन का यू-टर्न, एक महीने की छूट से वैश्विक बाजार में हलचल

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अमेरिका ने एक अहम फैसले के तहत रूसी तेल की खरीद को लेकर अपना रुख अचानक बदल दिया है। Donald Trump प्रशासन ने समुद्र के रास्ते रूस से तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने पर अस्थायी राहत फिर से लागू कर दी है, जिससे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में नई हलचल देखने को मिल रही है।

US Department of the Treasury ने देर रात अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर यह लाइसेंस जारी किया। इसके मुताबिक, जो रूसी तेल तय तारीख तक जहाजों पर लोड हो चुका है, उसे 16 मई 2026 तक खरीदा जा सकेगा। यह छूट करीब एक महीने के लिए प्रभावी रहेगी। खास बात यह है कि महज दो दिन पहले ही इस तरह की राहत को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया गया था, जिससे अब इस फैसले को एक बड़े यू-टर्न के रूप में देखा जा रहा है।

भारत ने इस फैसले पर साफ कर दिया है कि उसकी ऊर्जा नीति पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा। भारत पहले से ही अपनी जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रूस से कच्चे तेल और एलपीजी की खरीद जारी रखे हुए है और आगे भी संतुलित रणनीति पर कायम रहेगा।

इस फैसले को वैश्विक तेल कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है। हाल के दिनों में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, खासकर Israel और Iran के बीच टकराव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई थी। ऐसे में यह अस्थायी छूट आपूर्ति को संतुलित करने का प्रयास मानी जा रही है।

हालांकि, इस लाइसेंस में साफ तौर पर यह भी कहा गया है कि Cuba, North Korea और ईरान से जुड़े किसी भी लेन-देन को इसमें शामिल नहीं किया गया है, यानी प्रतिबंधों का दायरा अभी भी बरकरार है।

इससे पहले ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने संकेत दिए थे कि रूस और ईरान से जुड़े तेल पर दी गई राहत को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया था कि ईरान को मिली छूट के चलते वैश्विक बाजार में करीब 140 मिलियन बैरल तेल पहुंचा, जिससे सप्लाई का दबाव कुछ हद तक कम हुआ।

वहीं, रूसी राष्ट्रपति के दूत Kirill Dmitriev के अनुसार, इस तरह की राहत से लगभग 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल बाजार में आ सकता है, जो वैश्विक उत्पादन के एक दिन के बराबर है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से सप्लाई में थोड़ी राहत जरूर मिलेगी, लेकिन तेल की कीमतों में बड़ी गिरावट की उम्मीद फिलहाल नहीं की जा सकती। यानी बाजार को अस्थायी राहत तो मिलेगी, लेकिन असली स्थिरता अभी भी वैश्विक राजनीतिक हालात पर ही निर्भर करेगी।

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