छत्तीसगढ़ के बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है, खासकर उन लोगों के लिए जिनके घरों में स्मार्ट मीटर लगे हुए हैं। अब अगर किसी कारण से बकाया बिल के चलते बिजली कनेक्शन ऑटोमैटिक तरीके से काट दिया जाता है, तो उपभोक्ताओं को अंधेरे में बैठने की जरूरत नहीं पड़ेगी। नई व्यवस्था के तहत उपभोक्ता खुद अपने स्मार्ट मीटर में लगे पुश बटन को दबाकर अस्थायी रूप से बिजली कनेक्शन फिर से चालू कर सकेंगे।
दरअसल, पावर कंपनी ने बिजली नियामक आयोग में सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी कि यदि किसी उपभोक्ता का कनेक्शन बकाया बिल के कारण काट दिया जाता है, तो वह स्मार्ट मीटर में लगे पुश बटन को करीब 30 सेकंड तक दबाकर दोबारा कनेक्शन जोड़ सकता है। हालांकि यह कनेक्शन केवल सीमित समय के लिए ही रहेगा, जिससे उपभोक्ता को राहत मिल सके और वह इस दौरान अपना बकाया बिल जमा कर सके। अगर निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो कनेक्शन फिर से काट दिया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से छत्तीसगढ़ राज्य पॉवर कंपनी द्वारा महज हजार रुपये के बकाया पर भी उपभोक्ताओं के कनेक्शन सीधे कंट्रोल रूम से काटे जा रहे थे, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही थी। इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद बिजली नियामक आयोग ने स्वतः संज्ञान लिया और इस पर सुनवाई शुरू की।
सुनवाई के दौरान आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए पहले ही कनेक्शन काटने पर अस्थायी रोक लगा दी है। आयोग के सचिव एसपी शुक्ला के मुताबिक जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक किसी भी उपभोक्ता का कनेक्शन बकाया के आधार पर नहीं काटा जाएगा। इससे उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है।
पावर कंपनी ने आयोग को यह भी बताया कि कनेक्शन काटने और जोड़ने की प्रक्रिया पूरी तरह से तकनीकी सिस्टम के तहत संचालित होती है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि उपभोक्ता बकाया बिल का भुगतान कर देता है, तो एक घंटे के भीतर उसका कनेक्शन फिर से बहाल कर दिया जाता है।
हालांकि इस पूरी प्रक्रिया को लेकर आयोग ने एक अहम सवाल भी उठाया कि आखिर आम उपभोक्ता को यह कैसे पता चलेगा कि उसके स्मार्ट मीटर में पुश बटन कहां है और उसे कैसे इस्तेमाल करना है। इस पर आयोग ने पावर कंपनी को निर्देश दिया कि वह व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार करे और लोगों को इस नई सुविधा के बारे में जागरूक बनाए, ताकि हर उपभोक्ता इसका लाभ उठा सके।
अब साफ है कि स्मार्ट मीटर सिर्फ बिजली खपत मापने का उपकरण नहीं रह गया है, बल्कि यह उपभोक्ताओं को नियंत्रण और राहत देने वाला एक स्मार्ट समाधान बनता जा रहा है। आने वाले समय में यदि इस व्यवस्था को सही तरीके से लागू किया गया और लोगों को जागरूक किया गया, तो यह कदम बिजली उपभोक्ताओं के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।