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IIT में MTech का बड़ा बदलाव—अब इंडस्ट्री से जुड़ा होगा कोर्स, बढ़ेंगे नौकरी के मौके

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देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थान Indian Institutes of Technology यानी IITs में MTech को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। लंबे समय से खाली रह रही सीटों और छात्रों की घटती रुचि को देखते हुए सरकार अब MTech पाठ्यक्रम को पूरी तरह नए तरीके से डिजाइन करने की तैयारी में है। इस बदलाव का मकसद साफ है—डिग्री के बाद युवाओं को बेहतर रोजगार के अवसर मिल सकें और कोर्स इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक हो।

दरअसल, IIT काउंसिल में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया गया, जहां अलग-अलग IIT संस्थानों ने बताया कि MTech की कई सीटें हर साल खाली रह जाती हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि BTech के बाद छात्र सीधे नौकरी की ओर रुख कर लेते हैं और उसी संस्थान में MTech करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह रोजगार के सीमित अवसर और कोर्स में इंडस्ट्री एक्सपोजर की कमी मानी जा रही है।

इसी समस्या को दूर करने के लिए अब नया MTech पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा, जिसमें इंडस्ट्री की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। प्रस्तावित बदलावों में दोहरा MTech (रिसर्च और इंडस्ट्री आधारित), मल्टी-डिसिप्लिनरी कोर्स और हाइब्रिड मॉडल (ऑनलाइन + ऑफलाइन) को शामिल करने की योजना है। यानी अब MTech सिर्फ थ्योरी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रैक्टिकल और इंडस्ट्री अनुभव पर ज्यादा फोकस होगा।

सबसे अहम बदलाव यह होगा कि नए कोर्स में इंडस्ट्री इंटर्नशिप को अनिवार्य बनाया जा सकता है। इसके अलावा प्रोडक्ट आधारित कोर्स शुरू करने की भी तैयारी है, जहां रिसर्च पेपर प्रकाशित करना जरूरी नहीं होगा, बल्कि वास्तविक प्रोजेक्ट्स और स्किल डेवलपमेंट पर जोर दिया जाएगा। इससे छात्रों को सीधे जॉब-रेडी बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सरकार ने सभी 21 IIT संस्थानों को निर्देश दिए हैं कि वे मिलकर एक संयुक्त रिपोर्ट तैयार करें, जिसमें मौजूदा पाठ्यक्रम की स्थिति, इंडस्ट्री की जरूरतें और सुधार के सुझाव शामिल हों। इस रिपोर्ट के आधार पर नया सिलेबस तैयार किया जाएगा और सरकार की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जाएगा।

आंकड़ों पर नजर डालें तो समस्या की गंभीरता साफ नजर आती है। साल 2020-21 में करीब 3,229 MTech सीटें खाली रह गई थीं, जबकि 2021-22 में भी 3,083 सीटों पर दाखिला नहीं हो सका। इसका असर PhD कार्यक्रमों पर भी पड़ा है, जहां छात्रों की संख्या में गिरावट देखने को मिली है।

कुल मिलाकर, IIT का यह कदम MTech को फिर से आकर्षक बनाने और उसे सीधे रोजगार से जोड़ने की दिशा में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। अगर यह नया मॉडल सफल होता है, तो आने वाले समय में तकनीकी शिक्षा का स्वरूप ही बदल सकता है और छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ बेहतर करियर का रास्ता भी मिल सकेगा।

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