छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में हुए वेदांता प्लांट हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 22 मजदूरों की मौत हो चुकी है। ताजा मामले में पश्चिम बंगाल के मजदूर सुब्रोतो जेना, जो 80-90% तक झुलस गए थे, ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इससे पहले मध्यप्रदेश के एक अन्य मजदूर की भी इलाज के दौरान मौत हो चुकी थी। कुल 36 लोग इस हादसे में झुलसे हैं, जिनमें से 14 का इलाज अब भी अलग-अलग अस्पतालों में जारी है।
यह हादसा Vedanta Limited के प्लांट में हुआ, जहां शुरुआती जांच में गंभीर लापरवाही के संकेत मिले हैं। बताया जा रहा है कि उत्पादन बढ़ाने की जल्दबाजी में प्लांट पर अतिरिक्त दबाव डाला गया, जिसके चलते बॉयलर में विस्फोट हो गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक घंटे के भीतर उत्पादन 350 मेगावाट से बढ़ाकर लगभग 590 मेगावाट कर दिया गया था, जिससे सिस्टम पर असामान्य दबाव बना।
तकनीकी जांच में यह भी सामने आया कि बॉयलर के फर्नेस में अत्यधिक फ्यूल जमा हो गया था, जिससे अचानक प्रेशर बढ़ा और 1-2 सेकेंड के भीतर विस्फोट हो गया। इस धमाके की चपेट में आकर पाइपलाइन सिस्टम भी फेल हो गया। इसके अलावा मशीनों के रखरखाव में लापरवाही, पीए फैन की खराबी और बैकअप सिस्टम का समय पर काम न करना भी हादसे के कारणों में शामिल बताया गया है।
घटना के बाद पुलिस ने सख्त कदम उठाते हुए कंपनी के चेयरमैन Anil Agarwal समेत 10 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। वहीं जिला प्रशासन ने पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं, जिसकी रिपोर्ट 30 दिनों के भीतर मांगी गई है।
इस बीच, राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने FIR को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पत्रकारों को FIR की कॉपी नहीं दी जा रही और ‘ऊपर’ से निर्देश होने की बात कही जा रही है, जिससे पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार की ओर से भी सख्त रुख अपनाया गया है। श्रम मंत्री ने साफ कहा है कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं मृतकों के परिजनों और घायलों के लिए मुआवजे का ऐलान भी किया गया है। कंपनी ने मृतकों के परिवार को 35 लाख रुपये और नौकरी देने की घोषणा की है, जबकि घायलों को 15 लाख रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा केंद्र और राज्य सरकार की ओर से भी अलग-अलग सहायता राशि घोषित की गई है।
यह हादसा न सिर्फ औद्योगिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि उत्पादन बढ़ाने की होड़ में मानकों की अनदेखी कितनी भारी पड़ सकती है। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि इस त्रासदी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है।