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बस्तर में AI शिक्षा की एंट्री:जिले के 25 शिक्षकों को दी जा रही ट्रेनिंग, प्रशासन का दावा- 10 हजार बच्चों को मिलेगा फायदा

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बस्तर में स्कूली शिक्षा को डिजिटल और आधुनिक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। जिला प्रशासन ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और 21वीं सदी के स्किल्स को स्कूल स्तर तक पहुंचाने की शुरुआत की है। इसके तहत 15 से 17 अप्रैल तक धरमपुरा स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज में 3 दिवसीय शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

इस प्रशिक्षण में जिले के सभी ब्लॉकों से चयनित 25 शिक्षकों ने भाग लिया। इनमें गणित, विज्ञान और कंप्यूटर विषय के शिक्षक शामिल रहे। प्रशिक्षण का मुख्य फोकस एआई टूल्स के उपयोग, डिजिटल लर्निंग और क्लासरूम में नई तकनीकों को शामिल करने पर रहा। शिक्षकों को प्रैक्टिकल सेशन के जरिए यह सिखाया गया कि वे छात्रों को आसान तरीके से AI की जानकारी कैसे दे सकते हैं।

AI की दी जा रही बेसिक ट्रेनिंग

इस कार्यक्रम का संचालन ‘द पाई जैम फाउंडेशन’ ने किया। ट्रेनर नयन सोरी ने शिक्षकों को AI के बेसिक कॉन्सेप्ट से लेकर उसके इस्तेमाल तक की जानकारी दी। प्रशिक्षण के दौरान अलग-अलग गतिविधियों और उदाहरणों के माध्यम से शिक्षकों को समझाया गया कि, किस तरह AI को पढ़ाई का हिस्सा बनाया जा सकता है।

9वीं से 12वीं तक के बच्चों को मिलेगा फायदा

इस पहल का असर सीधे तौर पर स्कूलों में दिखेगा। प्रशिक्षण लेने वाले शिक्षक अब अपने-अपने स्कूलों में कक्षा 9वीं से 12वीं तक के स्टूडेंट्स को AI और डिजिटल स्किल्स की जानकारी देंगे। अनुमान है कि करीब 10 हजार से ज्यादा स्टूडेंट्स को इससे फायदा मिलेगा।

प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि, AI का उपयोग सिर्फ तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और अन्य क्षेत्रों में भी इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में छात्रों को शुरुआती स्तर पर ही इसकी जानकारी देना जरूरी है, ताकि वे आगे की पढ़ाई और करियर में बेहतर अवसर हासिल कर सकें।

बस्तर के छात्रों को डिजिटल दौर के लिए तैयार करना महत्वपूर्ण

जिला प्रशासन का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह के और कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे ज्यादा से ज्यादा शिक्षक और छात्र इससे जुड़ सकें। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह पहल बस्तर के छात्रों को डिजिटल दौर के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी।

अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के प्रशिक्षण से शिक्षकों की कार्यशैली में बदलाव आएगा और पढ़ाई का तरीका ज्यादा इंटरैक्टिव और समझने योग्य बनेगा। साथ ही छात्रों में नई तकनीकों के प्रति रुचि भी बढ़ेगी।

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