जगदलपुर। बस्तर वन मण्डल के माचकोट परिक्षेत्र में शनिवार को वन भूमि के विखंडन और अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध वन विभाग द्वारा प्रभावी कार्यवाही की गई है। दो अलग-अलग वन अपराध प्रकरणों में सुकमा जिले से आए 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहां सभी आरोपियों को रिमांड में केन्द्रीय जेल भेज दिया गया।
सभी आरोपियों के विरुद्ध भारतीय वन अधिनियम 1927 एवं लोक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम 1984 के सुसंगत प्रावधानों के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया गया है। जगदलपुर उप वन मण्डलाधिकारी योगेश कुमार रात्रे ने बताया कि वन संपदा की सुरक्षा हेतु निरंतर गश्त एवं निगरानी की जा रही है। आरोपियों के विरुद्ध कानूनी शिकंजा कसने के साथ-साथ जनजागरूकता पर भी बल दिया जा रहा है।
जीरो टॉलरेंस की अपनाई जा रही नीति
बस्तर के वन मण्डलाधिकारी उत्तम कुमार गुप्ता ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार वन भूमि पर अवैध कब्जे के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। वन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अवैध हस्तक्षेप संज्ञेय अपराध है और भविष्य में भी ऐसी सख्त वैधानिक कार्यवाही जारी रहेगी।
वन अपराधों पर पूर्णत: सजग
बस्तर वृत्त के मुख्य वन संरक्षक आलोक कुमार तिवारी ने बताया कि वनों का संरक्षण एवं सुरक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। मैदानी अमले की सतर्कता से इस अतिक्रमण को समय रहते रोका गया है। वन अपराधों पर नियंत्रण हेतु विभाग पूर्णत: सजग है।
ये वरिष्ठ लोग रहे उपस्थित
कार्यवाही में माचकोट के परिक्षेत्र अधिकारी सुमीत साहा के नेतृत्व में संपादित की गई। जिसमें परिक्षेत्र सहायक घुनुराम मरकाम, परिसर रक्षक घुड़सा राम मंडावी, रमेश कुमार बघेल, मोहन कुमार भारती, राजाराम कश्यप, गुलशन बघेल एवं वन प्रबन्धन समिति तोलावाड़ा के सुरक्षा श्रमिक रहे।