भूपेश बघेल ने कहा कि जिस कानून को लेकर आज भाजपा प्रदर्शन कर रही है, वह पहले ही सितंबर 2023 में सर्वसम्मति से पारित हो चुका है। उन्होंने आरोप लगाया कि अब उसी बिल की आड़ में परिसीमन का मुद्दा आगे बढ़ाया जा रहा है, जिससे भविष्य में राजनीतिक प्रतिनिधित्व की दिशा बदल सकती है। उनके मुताबिक, यह प्रक्रिया SC, ST और OBC वर्ग के अधिकारों को प्रभावित कर सकती है और यही असली चिंता का विषय है।
उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण के नाम पर एक बड़ा राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाया जा रहा है, जिस पर पूरे देश में बहस तेज हो चुकी है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे के जरिए जनगणना और परिसीमन जैसे संवेदनशील फैसलों को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai पर भी तंज कसा और कहा कि अगर सरकार को इतनी ही दिक्कत है तो किसी महिला को ही मुख्यमंत्री बना देना चाहिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि आरक्षण की सोच कांग्रेस की रही है और भाजपा ने हर बार इसमें बाधा डालने का काम किया।
भूपेश बघेल ने भाजपा पर तीखा हमला करते हुए उसे “लुगरा चोर” तक कह दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान की बात करने वाली पार्टी ही उनके अधिकारों को कमजोर कर रही है। आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि ये महिलाएं समाज की रीढ़ हैं और इनके सम्मान के नाम पर राजनीति करना गलत है।
नक्सलवाद के मुद्दे पर भी उन्होंने सरकार को घेरा। उनका कहना था कि जब तक पूरी तरह सुरक्षा बलों की वापसी नहीं होती, तब तक यह दावा करना कि नक्सलवाद खत्म हो गया है, सही नहीं होगा। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह को अब तक मिली सुरक्षा का हवाला देते हुए सरकार के दावों पर सवाल उठाए।
आर्थिक मुद्दों पर भी बघेल ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ अब चुनावी “एटीएम” नहीं, बल्कि “आरबीआई” बन चुका है, जहां से राजनीतिक फायदे के लिए संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सरकार पर वसूली और लूट के आरोप भी लगाए।
कुल मिलाकर, छत्तीसगढ़ की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता जा रहा है। एक तरफ भाजपा अपनी रणनीति के साथ मैदान में है, तो दूसरी ओर कांग्रेस भी आक्रामक रुख अपनाए हुए है। आने वाले समय में यह सियासी टकराव और तेज होने के संकेत दे रहा है।