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शेयर बाजार में रोलर-कोस्टर डे: सेंसेक्स-निफ्टी सपाट, लेकिन अंदरूनी कमजोरी ने बढ़ाई चिंता

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सोमवार का दिन शेयर बाजार के लिए पूरी तरह अस्थिरता से भरा रहा। कभी तेज़ी तो कभी गिरावट—इन उतार-चढ़ाव के बीच आखिरकार BSE Sensex और Nifty 50 लगभग सपाट बंद हुए। सेंसेक्स महज 27 अंकों की बढ़त के साथ 78,520 पर टिक गया, जबकि निफ्टी 11 अंक चढ़कर 24,365 पर बंद हुआ। ऊपर से भले ही बाजार स्थिर दिखा, लेकिन अंदर की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

असल में बाजार की चौड़ाई कमजोर रही—2471 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि सिर्फ 1733 शेयरों में तेजी आई। यह संकेत साफ है कि बाजार पर बिकवाली का दबाव लगातार बना हुआ है। वहीं India VIX में 10% से ज्यादा उछाल आकर 19.01 पर पहुंचना इस बात का संकेत है कि निवेशकों के बीच डर और अनिश्चितता तेजी से बढ़ रही है।

सेक्टोरल स्तर पर तस्वीर मिली-जुली रही। एनर्जी और ऑयल एंड गैस सेक्टर में खरीदारी देखने को मिली, वहीं PSU बैंक इंडेक्स में भी हल्की मजबूती आई। लेकिन बड़े शेयरों में दबाव बना रहा, जिससे बाजार की रफ्तार थम गई।

दिन के दौरान एक वक्त ऐसा भी आया जब बाजार ने शानदार वापसी दिखाई। सेंसेक्स 400 अंकों से ज्यादा उछल गया और निफ्टी 24,450 के करीब पहुंच गया। लेकिन ऊंचे स्तर पर भारी बिकवाली ने इस तेजी को ज्यादा देर टिकने नहीं दिया, और अंत में बाजार लगभग वहीं लौट आया जहां से शुरू हुआ था।

टॉप गेनर्स में Trent Ltd ने 3% से ज्यादा की छलांग लगाई। इसके अलावा JSW Steel, State Bank of India और Asian Paints में अच्छी खरीदारी देखी गई। दूसरी तरफ Hindalco Industries, Tata Motors, Larsen & Toubro और HDFC Life जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट ने बाजार पर दबाव बनाए रखा।

इस पूरे उतार-चढ़ाव के पीछे सबसे बड़ा कारण रहा कच्चे तेल की कीमतों में उछाल। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते तेल की कीमतें 95–98 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। खासतौर पर Strait of Hormuz को लेकर बढ़ती चिंता ने सप्लाई पर खतरे का संकेत दिया है, जिससे महंगाई का दबाव बढ़ सकता है।

वैश्विक संकेत भी ज्यादा उत्साहजनक नहीं रहे। अमेरिकी और एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला, जबकि निवेशक Middle East में बढ़ते तनाव को लेकर सतर्क बने हुए हैं। इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर दिखाई दे रहा है।

हालांकि हाल के दिनों में विदेशी निवेशकों की खरीदारी जारी है, लेकिन जोखिम बढ़ने की स्थिति में वे तेजी से पैसा निकाल भी सकते हैं। वहीं घरेलू निवेशक फिलहाल सतर्क रुख अपनाते हुए बिकवाली कर रहे हैं। चौथी तिमाही के नतीजों के चलते भी शेयरों में अलग-अलग प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, जिससे बाजार में अस्थिरता और बढ़ गई है।

कुल मिलाकर, बाजार अभी एक नाजुक मोड़ पर खड़ा है—जहां ग्लोबल घटनाएं, कच्चे तेल की कीमतें और निवेशकों की भावनाएं मिलकर दिशा तय कर रही हैं। आने वाले दिनों में उतार-चढ़ाव जारी रहने के पूरे आसार हैं, और निवेशकों के लिए सतर्क रहना ही सबसे बड़ी रणनीति होगी।

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