भारतीय शेयर बाजार में बुधवार का दिन आईटी सेक्टर के लिए भारी साबित हुआ, जब कमजोर तिमाही नतीजों ने निवेशकों का भरोसा हिला दिया। NIFTY IT Index में करीब 5 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई और यह लुढ़ककर 30159 के आसपास पहुंच गया। इस गिरावट ने साफ संकेत दे दिया कि वैश्विक हालात और घटते खर्च का असर अब सीधे कंपनियों के प्रदर्शन पर दिखने लगा है।
सबसे बड़ा झटका HCL Technologies को लगा, जिसके शेयर लगभग 11 प्रतिशत टूटकर 1283 रुपये तक आ गए। कंपनी ने मार्च तिमाही में मुनाफा जरूर बढ़ाया, लेकिन यह बाजार की उम्मीदों से कम रहा। राजस्व में बढ़ोतरी के बावजूद बढ़ते खर्च और कमजोर ग्लोबल डिमांड ने निवेशकों को निराश कर दिया, जिसका सीधा असर शेयर कीमत पर देखने को मिला।
आईटी सेक्टर की एक और प्रमुख कंपनी Persistent Systems भी दबाव से नहीं बच सकी। इसके शेयर करीब 5 प्रतिशत गिर गए। कंपनी की आय में बढ़त तो हुई, लेकिन अनुमान से कम रही और प्रॉफिट मार्जिन में भी गिरावट दर्ज की गई। डील्स की संख्या में कमी ने भी निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।
वहीं Tech Mahindra के शेयर भी 6 प्रतिशत से ज्यादा टूट गए। नतीजों से पहले ही निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए बिकवाली शुरू कर दी, जिससे स्टॉक पर दबाव बना रहा।
इस गिरावट की लहर बाकी दिग्गज कंपनियों तक भी पहुंची। Coforge और LTIMindtree के शेयरों में 4-6 प्रतिशत तक की गिरावट आई, जबकि Tata Consultancy Services (TCS) भी करीब 4 प्रतिशत नीचे फिसल गया। Infosys के शेयरों में भी 4 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट देखी गई, खासतौर पर ऐसे समय में जब कंपनी के नतीजों का इंतजार किया जा रहा है।
हालांकि इस पूरे नकारात्मक माहौल के बीच Oracle Financial Services Software ने हल्की बढ़त दर्ज कर थोड़ी राहत जरूर दी, लेकिन यह अपवाद ही साबित हुआ।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर आर्थिक अनिश्चितता, कंपनियों द्वारा टेक्नोलॉजी खर्च में कटौती और नए प्रोजेक्ट्स में सुस्ती ने आईटी सेक्टर की ग्रोथ पर ब्रेक लगा दिया है। यही वजह है कि निवेशकों का भरोसा कमजोर पड़ रहा है और वे फिलहाल सतर्क रणनीति अपना रहे हैं।
कुल मिलाकर, आईटी सेक्टर के लिए यह गिरावट सिर्फ तात्कालिक झटका नहीं बल्कि एक बड़े ट्रेंड का संकेत हो सकती है। अगर वैश्विक मांग में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में इस सेक्टर पर दबाव और बढ़ सकता है।