छत्तीसगढ़ के भिलाई से एक अहम राजनीतिक खबर सामने आई है, जिसने पूरे क्षेत्र में उत्साह और गर्व का माहौल बना दिया है। वैशाली नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक रिकेश सेन को केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर की एक प्रतिष्ठित समिति में शामिल किया गया है। यह समिति महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती के उपलक्ष्य में गठित की गई है, जो देशभर में सामाजिक जागरूकता और समानता के संदेश को मजबूत करने का काम करेगी।
इस उच्च स्तरीय समिति की खास बात यह है कि इसकी अध्यक्षता खुद देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से गठित इस समिति में देशभर से कुल 126 प्रमुख व्यक्तित्वों को शामिल किया गया है, जिनमें रिकेश सेन को 91वां स्थान दिया गया है। यह चयन न केवल उनकी राजनीतिक सक्रियता को दर्शाता है, बल्कि उनके सामाजिक योगदान को भी राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिलने का संकेत देता है।
महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती को ऐतिहासिक रूप से मनाने के लिए यह राष्ट्रीय कार्यक्रम दो वर्षों तक चलेगा। इसकी शुरुआत 11 अप्रैल 2026 से होगी और 11 अप्रैल 2028 तक देशभर में विविध आयोजन किए जाएंगे। इन आयोजनों का मुख्य उद्देश्य समाज में समानता, शिक्षा के विस्तार और महिला सशक्तिकरण जैसे मूल्यों को जन-जन तक पहुँचाना है। इस पूरी पहल को लेकर सरकार की योजना बेहद व्यापक और प्रभावशाली मानी जा रही है। इस समिति का गठन 13 अप्रैल 2026 को आधिकारिक गजट में प्रकाशित किया जा चुका है, जिससे इसकी औपचारिकता और महत्व और भी बढ़ जाता है।
समिति की भूमिका सिर्फ औपचारिक नहीं होगी, बल्कि यह देशभर में होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करने से लेकर उनके सफल क्रियान्वयन तक सक्रिय भागीदारी निभाएगी। केंद्र सरकार के अधिकारियों के अनुसार, समिति के सदस्य अपने अनुभव और सुझावों के माध्यम से इन आयोजनों को प्रभावी और जनसरोकार से जोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। यही वजह है कि इसमें शामिल हर सदस्य की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है।
इस नियुक्ति के बाद विधायक रिकेश सेन को केंद्र सरकार की ओर से आधिकारिक बधाई भी भेजी गई है। भारत सरकार के संयुक्त सचिव समर नंदा ने पत्र के माध्यम से उन्हें इस नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं और उम्मीद जताई कि उनका अनुभव इस राष्ट्रीय पहल को और मजबूती प्रदान करेगा।
जैसे ही यह खबर सामने आई, भिलाई और खासकर वैशाली नगर क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। स्थानीय लोगों, समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने इसे केवल एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के सम्मान के रूप में देखा। लोगों का मानना है कि इस तरह की जिम्मेदारियां राज्य की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत करती हैं।
यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि क्षेत्रीय नेतृत्व जब राष्ट्रीय मंच पर पहुंचता है, तो उसका प्रभाव सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सामाजिक बदलाव की दिशा में भी नई ऊर्जा देता है। रिकेश सेन की यह नियुक्ति आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।