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इलाज के नाम पर दरिंदगी—ढोंगी बाबा की करतूत ने खोली अंधविश्वास की खतरनाक सच्चाई

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छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक बेहद शर्मनाक और चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां आस्था और विश्वास का फायदा उठाकर एक तथाकथित बाबा ने इंसानियत को तार-तार कर दिया। पामगढ़ थाना क्षेत्र में सामने आई इस घटना ने यह दिखा दिया कि किस तरह कुछ लोग धर्म और चमत्कार के नाम पर भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाकर अपराध को अंजाम देते हैं। इस मामले में आरोपी निर्मल बाबा (60) को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है, जो मूल रूप से महाराष्ट्र के नासिक का रहने वाला बताया जा रहा है।

पीड़िता के अनुसार, वह लंबे समय से शरीर में दर्द की समस्या से परेशान थी और इसी समस्या के समाधान की उम्मीद लेकर वह अपनी एक सहेली के साथ आरोपी के पास पहुंची थी। आरोपी खुद को चमत्कारी बताता था और लोगों की बीमारियां ठीक करने का दावा करता था। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए उसने महिला को अपने प्रभाव में लिया और ‘प्रसाद’ के नाम पर उसे झांसे में फंसा लिया।

आरोपी ने धीरे-धीरे महिला का विश्वास जीतते हुए उसे अपने साथ मध्यप्रदेश के मैहर चलने के लिए राजी कर लिया। वहां एक होटल में ठहराकर उसने इलाज के बहाने उसके साथ दुष्कर्म किया। इतना ही नहीं, उसने महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें भी खींच लीं, जिससे बाद में उसे ब्लैकमेल किया जा सके। यह पूरी घटना दर्शाती है कि किस तरह योजनाबद्ध तरीके से आरोपी ने महिला को अपने जाल में फंसाया।

घटना यहीं खत्म नहीं हुई। जब पीड़िता ने विरोध किया और आरोपी से दूरी बनाने की कोशिश की, तो उसने सोशल मीडिया का सहारा लेकर उसकी जिंदगी को और मुश्किल बना दिया। आरोपी ने महिला के नाम से फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाकर उसकी अश्लील तस्वीरें पोस्ट कर दीं और उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। यह कृत्य न केवल अपराध है, बल्कि पीड़िता के आत्मसम्मान पर गहरा हमला भी है।

पीड़िता ने हिम्मत जुटाकर 11 अप्रैल 2026 को पामगढ़ थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस हरकत में आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी पुलिस अधीक्षक निवेदिता पाल के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी की लोकेशन हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में ट्रेस की गई, जहां दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

जांच में सामने आया कि आरोपी ने पूछताछ के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया है। पुलिस ने उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 64(2)(एम) और आईटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज कर उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है। इस कार्रवाई में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक उमेश कुमार कश्यप और एसडीओपी अकलतरा प्रदीप कुमार सोरी की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

यह घटना एक बार फिर समाज के सामने यह सख्त सवाल खड़ा करती है कि अंधविश्वास और झूठे चमत्कारों के जाल में फंसना कितना खतरनाक हो सकता है। जरूरत है कि लोग ऐसे तथाकथित बाबाओं से सावधान रहें और किसी भी प्रकार की चिकित्सा समस्या के लिए केवल प्रमाणित और विश्वसनीय चिकित्सा संस्थानों का ही सहारा लें। साथ ही, इस तरह के मामलों में पीड़ितों का आगे आकर शिकायत करना और कानून का साथ देना ही ऐसे अपराधियों को सजा दिलाने का सबसे मजबूत रास्ता है।

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