छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक आचरण दोनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरिमा थाना क्षेत्र में एक भाजपा नेता ने पटवारी कार्यालय में घुसकर न केवल हंगामा किया, बल्कि पटवारी और ऑपरेटर के साथ बेरहमी से मारपीट भी की। यह पूरी घटना सीसीटीवी में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
आरोपी की पहचान जितेंद्र कुजूर के रूप में हुई है, जो भाजपा के एसटी मोर्चा में मंडल अध्यक्ष बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, वह जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े काम में भी सक्रिय है। घटना के वक्त ग्राम कंठी के पटवारी प्रकाश मंडल अपने कार्यालय में मौजूद थे।
विवाद की शुरुआत एक साधारण सवाल से हुई, जो कुछ ही मिनटों में हिंसा में बदल गया। आरोपी नेता ने पटवारी से आरआई का मोबाइल नंबर मांगा। जब पटवारी ने बताया कि नंबर दीवार पर लिखा है और खुद कॉल कर सकते हैं, तो इस जवाब से भड़के आरोपी ने अचानक मारपीट शुरू कर दी। उसने पहले पटवारी को लात-घूंसे मारे, फिर बीच-बचाव करने आए ऑपरेटर को भी नहीं छोड़ा।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पटवारी खुद को बचाने के लिए बाहर भागे, लेकिन आरोपी ने पीछा करते हुए उन्हें बाहर भी लात और डंडों से पीटा। किसी तरह जान बचाकर पटवारी कमरे में घुसे और दरवाजा बंद कर खुद को सुरक्षित किया। इस पूरी घटना ने सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
मामले की जानकारी मिलते ही पटवारी संघ सक्रिय हो गया और दरिमा थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। जब यह मामला सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के संज्ञान में आया, तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। पुलिस ने देर रात एफआईआर दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
हालांकि, गिरफ्तारी के बावजूद विवाद थमा नहीं है। पटवारी संघ ने आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए उसका जुलूस निकालने की बात कही है। संघ के जिलाध्यक्ष संतोष अग्रवाल ने साफ कहा है कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन किया जाएगा।
इस घटना के बाद आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट भी चर्चा में आ गए हैं, जहां उसने पहले भी हथियारों के साथ अपने वीडियो और प्रभावशाली लोगों के साथ तस्वीरें पोस्ट की थीं। इससे उसकी कथित दबंगई की छवि और स्पष्ट हो रही है।
यह घटना सिर्फ एक मारपीट का मामला नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक तंत्र में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा, राजनीतिक हस्तक्षेप और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। अब देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या सख्त कदम उठाए जाते हैं और क्या इससे ऐसे मामलों पर रोक लग पाएगी।

