अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगियों के रिश्तों में एक बार फिर दरार की खबरें सामने आ रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नाटो देशों को “अच्छे” और “शरारती” सहयोगियों में बांटने वाली एक कथित सूची तैयार की है। कहा जा रहा है कि यह वर्गीकरण ईरान से जुड़े सैन्य टकराव में अमेरिका को मिले समर्थन के आधार पर किया गया है।
सूत्रों के अनुसार, इस सूची का उद्देश्य साफ है—जो देश अमेरिका के साथ खड़े रहे, उन्हें रणनीतिक और सैन्य लाभ दिए जा सकते हैं, जबकि जो देश पीछे हटे या तटस्थ रहे, उन्हें दबाव या प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह की सोच को अमेरिका की नई “रिवार्ड एंड पनिशमेंट” नीति के तौर पर देखा जा रहा है, जो पारंपरिक गठबंधनों के संतुलन को बदल सकती है।
बताया जा रहा है कि इस विचार की शुरुआत अमेरिकी रक्षा नेतृत्व के स्तर पर हुई थी और इसे हाल के महीनों में आकार दिया गया। नाटो महासचिव मार्क रुटे की वॉशिंगटन यात्रा से पहले इस सूची को अंतिम रूप देने की चर्चा है। इसमें खास तौर पर उन देशों को प्राथमिकता दी गई है, जिन्होंने सैन्य सहयोग, लॉजिस्टिक सपोर्ट या बेस उपलब्ध कराकर अमेरिका की मदद की।
संभावित “अच्छे सहयोगियों” में पोलैंड और रोमानिया जैसे देशों का नाम सामने आ रहा है। पोलैंड अपने रक्षा बजट में लगातार बढ़ोतरी कर रहा है, जिसकी अमेरिका ने सराहना की है। वहीं रोमानिया ने कथित तौर पर अपने एयरबेस अमेरिकी अभियानों के लिए उपलब्ध कराए। इसके उलट, कई यूरोपीय देशों ने खाड़ी क्षेत्र में सैन्य भागीदारी से दूरी बनाई, जिससे वॉशिंगटन नाराज बताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि अमेरिका इस सूची के आधार पर कुछ कड़े कदम उठा सकता है—जैसे कुछ देशों से अमेरिकी सैनिकों की तैनाती घटाना या उन्हें उन्नत सैन्य तकनीक की आपूर्ति सीमित करना। हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि ऐसे कदम अमेरिका के लिए भी जोखिम भरे हो सकते हैं, क्योंकि नाटो की सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था आपसी निर्भरता पर ही टिकी है।
हाल के बयानों में ट्रंप ने सहयोगियों पर खुलकर नाराजगी जताई है। उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण समय पर नाटो देशों ने अपेक्षित सहयोग नहीं दिया और बाद में मदद की पेशकश बेकार साबित हुई। उनका यह रुख संकेत देता है कि भविष्य में अमेरिका अपने गठबंधनों को “परफॉर्मेंस” के आधार पर आंक सकता है।
फिलहाल व्हाइट हाउस ने इस सूची की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन अगर ऐसी कोई रणनीति लागू होती है तो यह नाटो के भीतर लंबे समय से चले आ रहे विश्वास और एकजुटता को चुनौती दे सकती है। ईरान से जुड़े तनाव के बीच यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय राजनीति में एक नए समीकरण की ओर इशारा कर रहा है।
कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक सूची का नहीं, बल्कि वैश्विक गठबंधनों की बदलती प्रकृति का संकेत है—जहां अब रिश्ते आदर्शों से ज्यादा रणनीतिक हितों पर टिकते नजर आ रहे हैं।