छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों को लेकर जारी एक अहम आदेश पर सरकार ने महज 24 घंटे के भीतर यू-टर्न ले लिया। छत्तीसगढ़ शासन ने 21 अप्रैल को जारी उस निर्देश को स्थगित कर दिया है, जिसमें कर्मचारियों के राजनीतिक और अन्य संगठनों में शामिल होने पर सख्त रोक लगाई गई थी। इस फैसले से कर्मचारियों और विभिन्न संगठनों को बड़ी राहत मिली है।
दरअसल, 21 अप्रैल को जारी आदेश में कहा गया था कि कोई भी शासकीय कर्मचारी किसी राजनीतिक दल या अन्य संगठन से जुड़ नहीं सकता, न ही किसी पद पर रह सकता है। इतना ही नहीं, किसी भी संस्था में शामिल होने से पहले शासन से अनुमति लेना भी अनिवार्य कर दिया गया था। इस निर्देश को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम के तहत लागू किया गया बताया गया था।
हालांकि, आदेश जारी होते ही कर्मचारियों के बीच नाराजगी फैल गई। विभिन्न कर्मचारी संगठनों और प्रतिनिधियों ने इसे कड़े प्रतिबंध के रूप में देखा और विरोध शुरू हो गया। बढ़ते असंतोष के बीच सरकार ने तेजी से कदम उठाते हुए 22 अप्रैल को नया परिपत्र जारी कर दिया।
नए आदेश में साफ तौर पर कहा गया कि 21 अप्रैल को जारी किया गया निर्देश तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाता है और यह अगली सूचना तक लागू नहीं रहेगा। यानी फिलहाल कर्मचारियों पर लगाए गए सभी प्रतिबंध हट गए हैं और स्थिति पहले जैसी हो गई है।
इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं कि इतना बड़ा आदेश बिना व्यापक विचार-विमर्श के क्यों जारी किया गया और फिर इतनी जल्दी वापस क्यों लेना पड़ा। हालांकि, सरकार के इस फैसले से फिलहाल कर्मचारियों में राहत का माहौल जरूर है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि सरकार आगे इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है—क्या नए सिरे से कोई संशोधित नियम लाए जाएंगे या फिर इसे पूरी तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।