भारतीय क्रिकेट में अब साफ संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में टेस्ट क्रिकेट को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने रणनीति में बदलाव करते हुए तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह को मौजूदा विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप चक्र के लगभग सभी मुकाबलों में खेलने के लिए तैयार रहने का संदेश दिया है।
टीम का लक्ष्य साफ है—टेस्ट फॉर्मेट में मजबूत वापसी कर फाइनल की दौड़ में दोबारा जगह बनाना। फिलहाल भारतीय टीम अंक तालिका में पीछे चल रही है, ऐसे में हर आगामी टेस्ट मुकाबला निर्णायक माना जा रहा है।
आने वाले कार्यक्रम पर नजर डालें तो भारत को श्रीलंका और न्यूजीलैंड दौरे पर दो-दो टेस्ट मैच खेलने हैं, जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ घरेलू सरजमीं पर पांच मैचों की बड़ी और अहम सीरीज होगी। खासकर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह सीरीज टीम के लिए असली परीक्षा मानी जा रही है, जहां बुमराह की भूमिका निर्णायक होगी।
हालांकि, बुमराह के वर्कलोड को लेकर भी बोर्ड सतर्क है। पिछले दौरों में उन्हें सीमित टेस्ट खिलाने के फैसलों पर सवाल उठे थे, लेकिन अब रणनीति बदली है। उन्हें टेस्ट में लगातार खेलने के लिए तैयार किया जाएगा, जबकि वनडे जैसे सीमित ओवर फॉर्मेट में उन्हें आराम दिया जा सकता है, ताकि उनकी फिटनेस बनी रहे।
सूत्रों के मुताबिक, चयनकर्ता और टीम मैनेजमेंट दोनों इस बात पर सहमत हैं कि बुमराह की फिटनेस ही टीम की गेंदबाजी ताकत की कुंजी है। इसलिए उनका कार्यभार संतुलित रखते हुए उन्हें लंबे फॉर्मेट के लिए पूरी तरह तैयार रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
इसी बीच 6 जून से अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाला एकमात्र टेस्ट मैच भी टीम के लिए अहम साबित हो सकता है। भले ही यह मुकाबला WTC का हिस्सा नहीं है, लेकिन इसे बेंच स्ट्रेंथ को परखने और खिलाड़ियों की तैयारी जांचने के मौके के रूप में देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, भारतीय टीम अब टेस्ट क्रिकेट को लेकर ज्यादा आक्रामक और गंभीर नजर आ रही है। रणनीति में यह बदलाव साफ संकेत देता है कि आने वाले महीनों में टीम पूरी ताकत के साथ रेड-बॉल क्रिकेट में वापसी की कोशिश करेगी—और इस मिशन के केंद्र में होंगे जसप्रीत बुमराह।